संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत। परिवहन निगम का गांवों तक परिवहन सेवा प्रदान करने का दावा खोखला साबित हो रहा है। आलम यह है कि एक दशक बाद भी क्षेत्र के 10 से 15 गांवों के हजारों लोग परिवहन सुविधा से वंचित हैं। उन्हें जुगाड़ व निजी वाहनों से गतंव्य पहुंचना पड़ रहा है। लगातार शिकायतों के बावजूद अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। इससे ग्रामीणों में आक्रोश है।
बड़ौत-मेरठ मार्ग पर गुराना, बड़ावद, फतेहपुर पुट्ठी, धनौरा सिल्वर नगर, पोइस, नांगल, तितरौदा, तेड़ा, कैड़वा समेत दस से 15 गांव हैं। एक दशक से ज्यादा समय से इन गांवों के ग्रामीण रोडवेज बस से वंचित हैं। लोगों को जुगाड़ में जान खतरे में डालकर सफर करना पड़ रहा है। इसको लेकर लोगों में आक्रोश है।
धनौरा सिल्वर नगर निवासी सत्यवीर सिंह राठी का कहना है कि दर्जनों बार सीएम पोर्टल पर शिकायत की जा चुकी है। इसके बावजूद रोडवेज बसों की सुविधा नहीं मिल रही है। क्षेत्र के लोगों को मजबूरी में जुगाड़ में सफर करना पड़ रहा है।
धनौरा सिल्वर नगर निवासी कंवरपाल ने बताया कि दिन के समय तो दो-चार जुगाड़ मिल जाते हैं। शाम होते ही उनके पहिए भी थम जाते हैं। मजबूरी में निजी वाहनों से सफर करना पड़ रहा है।
फतेहपुर पुट्ठी निवासी मनोज व दीपक ने बताया कि परिवहन सुविधा बहुत खराब है। जुगाड़ में ही दोगुना किराया देकर सफर करना पड़ रहा है।
वर्जन
यह रूट हमारे आधीन नहीं आता है। यहां पर मेरठ व भैंसाली डिपो की बसें संचालित हैं। अक्सर लोग इस रूट पर बसों को संचालित करने की मांग कर रहे हैं।-नरेंद्र मान, स्टेशन प्रभारी बड़ौत डिपो