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Baghpat News: वीतराग स्वामी कल्याणदेव का जीवन समाज और राष्ट्र का पथ प्रदर्शक

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मोरना । शुकतीर्थ के जीर्णोंद्धारक स्वामी कल्याणदेव जी महाराज की 20वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित कर भावपूर्ण स्मरण किया गया। जनप्रतिनिधियों, संतों, आचार्यों शिक्षाविदों और अनुयायियों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। प्रदेश के कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार ने कहा कि स्वामी कल्याणदेव महान दूरदृष्टि के महापुरुष थे। उन्होंने धर्म और संस्कृति की स्थापना के साथ शिक्षा के सैकड़ों मंदिर बनवाए।
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रविवार को भागवत पीठ श्री शुकदेव आश्रम स्थित डोंगरे जी भागवत भवन में आयोजित सभा में पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद ने अतिथियों का अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि गुरुदेव का जीवन दर्शन लोकहित का एक दिव्य शास्त्र है, जिसके द्वारा संपूर्ण मानव जाति को उत्थान का प्रेरणापुंज प्राप्त होता है। व्यास श्याम मनावत और कथा वाचक वसुंधरा पाठक ने संत विभूति को तपस्या और वैराग्य की दिव्य मूर्ति बताया।
ट्रस्ट कोषाध्यक्ष व मदरहुड यूनिवर्सिटी के कुलपति नरेंद्र शर्मा ने वीतराग संत को बचपन में सुनाई रागनी प्रस्तुत की। अध्यक्षता वैदिक संस्कार चेतना अभियान संयोजक आचार्य गुरुदत्त आर्य ने की। ट्रस्ट महामंत्री केके विज, सचिव देवराज पंवार, पूर्व न्यायधीश एवं ट्रस्टी बीबी सिंह, कपिल गुप्ता, उद्यमी सतीश गोयल ने अतिथियों का आभार वक्त किया। कथा व्यास अचल कृष्ण शास्त्री, सुमन शास्त्री, युवराज ने मंत्र पाठ किया। संचालन कल्याणकारी इंटर कालेज बघरा के पूर्व प्रवक्ता गजेंद्र पाल सिंह ने किया। उधर, आर्य समाज गांधी काॅलोनी के देवेंद्र पाल सिंह राणा, गजेंद्र पाल सिंह, चौधरी महेंद्र तेवतिया, आनंद पालसिंह आर्य, रवि निर्वाल, सरदार बलविंद्र सिंह, नरेश विश्वकर्मा, अशोक शर्मा आदि ने श्रद्धाजंलि अर्पित की।
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समाधि मंदिर में चरण पादुका अभिषेक, मंडलायुक्त ने दी श्रद्धांजलि
सहारनपुर मंडल आयुक्त डॉ. ऋषिकेश भास्कर यशोद ने पद्मभूषण वीतराग स्वामी कल्याण देव के समाधि मंदिर में श्रद्धाजंलि अर्पित की। आचार्य गिरीश चंद्र उप्रेती, आचार्य अरुण और विद्यार्थियों ने मंत्रपाठ किया। स्वामी भरतदेव, स्वामी कनक प्रभानंद, ट्रस्टी नरेंद्र शर्मा, ओमदत्त देव, रमेश मलिक, उदल सिंह मौजूद रहे। उधर, पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद की ओर से लिखी गई पुस्तक शुकतीर्थ का संक्षिप्त परिचय के 13वें संस्करण का विमोचन अतिथियों ने किया।
साधु-महात्माओं ने अर्पित की श्रद्धाजंलि
मोरना। शुकदेव आश्रम के श्री डोंगरेजी भागवत भवन में आयोजित शिक्षाऋषि की श्रद्धांजलि सभा में स्वामी गोवर्धन दास, स्वामी भरत देव, स्वामी वेद दास, महामंडलेश्वर स्वामी गोपाल दास, स्वामी कनक प्रभानंद, उज्जैन के कथा व्यास श्याम मनावत, महाराष्ट्र की कथाव्यास वसुंधरा पाठक आदि संतों कथावाचकों ने शुकतीर्थ के जीर्णोद्धारक संत को श्रद्धांजलि अर्पित की।
सच्चे संत थे स्वामी कल्याणदेव: राकेश टिकैत
भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने कहा कि वीतराग स्वामी कल्याणदेव सरलता, सादगी की प्रतिमूर्ति थे। ग्रामोत्थान के लिए उन्होंने अशिक्षा का अंधियारा मिटाने का दृढ़ संकल्प लिया। हमने बचपन से उनकी सच्ची सेवाओं की कहानियां सुनी थी। भाकियू नेता युद्धवीर सिंह ने कहा कि वीतराग संत ने संपूर्ण जीवन की आहुति मानव कल्याण में दी।
ग्रामीण अंचल में शिक्षा की क्रांति लाए संत: हरेंद्र मलिक
सपा सांसद हरेंद्र मलिक ने कहा कि वीतराग संत ने शिक्षा की क्रांति से ग्रामोत्थान का संकल्प पूरा किया। बागपत से लोकसभा सांसद डॉ. राजकुमार सांगवान ने कहा कि वीतराग स्वामी कल्याणदेव ने अपने तप, त्याग और तपस्या से शुकतीर्थ स्थापित किया है। बिजनौर सांसद चंदन चौहान ने कहा कि वीतराग संत ने वंचितों, शोषितों और उपेक्षित वर्ग को शिक्षित कर आगे बढ़ाने का काम किया। वो संत नहीं देवता थे।
श्रद्धाजंलि सभा में रहे मौजूद
संयुक्त सचिव गृह ध्रुव पाल सिंह, रालोद जिलाध्यक्ष संदीप मलिक, पूर्व जिलाध्यक्ष अजीत राठी, एसडीएम सुबोध कुमार, धामपुर एसडीएम रितु चौधरी, सीओ भोपा डॉ रवि शंकर आंदोलनकारी विजय मास्टरजी मौजूद रहे।
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