बागपत। सरूरपुर कलां गांव में सात साल के बच्चे की हत्या कर आत्महत्या दिखाने को शव फांसी के फंदे पर लटकाने वाले को न्यायाधीश ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही तीस हजार रुपये अर्थदंड लगाया।
अपर जिला शासकीय अधिवक्ता अमित खोखर ने बताया कि सरूरपुरकलां गांव के रहने वाले ईश्वर ने मई 2019 में कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराते हुए बताया कि 13 मई 2019 को वह पत्नी व अन्य सदस्यों के साथ काम पर गया था। जब वह वापस लौटा तो मकान में ऊपर बने कमरे में उसके सात वर्षीय बेटे का शव चुनरी में फांसी के फंदे पर लटका मिला। उन्होंने बेटे का शव दफना दिया लेकिन बाद में अनहोनी की आशंका को देखते हुए शव का पोस्टमार्टम कराने की मांग की। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हत्या के बाद शव लटकाना सामने आया।
ईश्वर का यह भी कहना था तीन साल पहले उसके बेटे के साथ गांव के ही अभिषेक ने कुकर्म का प्रयास किया था, जिसके बाद झगड़ा होने पर बेटे की हत्या करने की धमकी दी गई थी। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर अभिषेक को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
अपर जिला शासकीय अधिवक्ता अमित खोखर ने बताया कि हत्या के मुकदमे की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायालय पॉक्सो में हुई। सुनवाई पूरी होने पर न्यायाधीश ने हत्या और साक्ष्य छिपाने पर अभिषेक को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। उस पर तीस हजार रुपये अर्थदंड लगाया। अर्थदंड अदा नहीं करने पर एक साल की सजा बढ़ाने के आदेश दिए गए।