बागपत। 16 दिसंबर से खरमास शुरू हो रहा है, जो 14 जनवरी तक रहेगा। इस दौरान सभी मांगलिक कार्य जैसे सगाई, विवाह, निर्माण कार्यों पर विराम लग जाएगा। 14 जनवरी को सूर्यदेव मकर राशि में प्रवेश करने पर मांगलिक कार्य शुरू होंगे।
ज्योतिषाचार्य पंडित राजकुमार शास्त्री ने बताया कि सनातन धर्म में खरमास को खराब मास और शुभ कार्यों के लिए अनुचित समय माना जाता है। खरमास में ग्रहों और नक्षत्रों की धरती से दूरी होने के कारण इस मास में शुभ कार्य नहीं किया जाता हैं। खरमास में विवाह, सगाई जनेऊ, गृह प्रवेश, लग्न, मुंडन और मंगल कार्यों पर भी रोक लग जाती है।
16 दिसंबर को सुबह 9:58 बजे खरमास शुरू होगा। खरमास के समय सूर्य की चाल धीमी हो जाती है, इसलिए इस समय कोई भी शुभ कार्य करना वर्जित माना जाता है। खरमास में पूजा पाठ, मंत्र साधना कर सकते हैं।
ग्रंथों के अनुसार सूर्य जब धनु राशि में प्रवेश करते हैं तो सूर्य की गति कम हो जाती है। सूर्य की इस गति का जीवन पर भी पड़ता है। कुंडली में कोई दोष होने पर खरमास में पूजा पाठ करा सकते है और खरमास में दान पुण्य करना शुभ माना जाता है।
खरमास में पीपल पेड़ की आराधना करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। खरमास में तुलसी पर जल अर्पित करने और शाम में दीपक जलाने से दुखों का निवारण होता है। पूजन के दौरान ऊं नमो भगवते वासुदेवाय नम: का जाप करने जीवन की बाधाएं दूर हो जाती हैं।