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Baghpat News: -पहले ही दिन खानापूर्ति की भेट चढ़ी कलश यात्रा

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-अमृत कलश यात्रा में एबीएसए ने स्कूली बच्चों को भेजने से किया इंकार
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-एबीएसए के आदेशों का हवाला देते हुए ग्राम प्रधान को प्रधानाध्यापिका ने वापस भेजा
बड़ौत। आजादी के अमृत महोत्सव योजना के अंतर्गत सोमवार को जलालपुर गांव में निकाली गई मेरी माटी मेरा देश अमृत कलश यात्रा में स्कूली बच्चों के शामिल न होने के चलते अव्यवस्थाओं की भेंट चढ़ गई। वहीं स्वयं सहायता समूह की महिलाओं समेत अन्य ग्रामीणों और कुछ स्कूली बच्चों को लेकर गांव के मुख्य रास्तों से कलश यात्रा निकाली गई और लोगों को पंच प्रण की शपथ भी दिलाई गई।
दरअसल सोमवार से अमृत महोत्सव योजना के अंतर्गत मेरी माटी मेरा देश के तहत अमृत कलश यात्रा शुरू हुई। जिसके चलते जलालपुर गांव में भी अमृत कलश यात्रा निकाली जानी थी। जहां ग्राम प्रधान संजीव कुमार व ग्राम प्रधान भूपेन्द्र ने पूरी तैयारी कर रखी थी। ग्राम प्रधान संजीव का आरोप है कि जब वह गांव में स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय में यात्रा में शामिल होने के लिए बच्चों को बुलाने के लिए पहुंचे, तो विद्यालय में तैनात प्रधानाध्यापिका बालेश ने एबीएसए रसीद सिद्दकी के आदेशों का हवाला देते हुए यात्रा में बच्चों को भेजने से मना कर दिया। जिसके बाद ग्राम प्रधान व सचिव ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आशा, पंचायत कर्मचारी सहित अन्य ग्रामीणों की मदद से गांव के मुख्य रास्तों से यात्रा निकाली। ढोल-नगाड़ों के साथ यात्रा में शामिल लोगों ने घर-घर जाकर कलश में मुट्ठी भर मिट्टी और चावल एकत्र किए। यात्रा के दौरान सभी लोगों को देशभक्ति के जज्बे के साथ पंच प्रण की शपथ भी दिलाई गई। पंचायत सचिवालय से शुरू हुई यात्रा गांव की गलियों से होती हुई पंचायत सचिवालय पर समाप्त हुई।
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वर्जन
यात्रा में स्कूली बच्चों को शामिल करने के लिए विद्यालय गया था, लेकिन वहां पर तैनात प्रधानाध्यापिका बालेश ने बच्चे भेजने से इंकार कर दिया। कहा कि एबीएसए ने बच्चों को भेजने के लिए मना किया है- संजीव ग्राम प्रधान जलालपुर

वर्जन-
एबीएसए ने यात्रा में बच्चों को भेजने के लिए मना किया था, वजह की जानकारी नहीं है, अधिकारी हैं इसलिए आदेश का पालन करना पड़ा, हालांकि बाद में कुछ बच्चों को यात्रा में भेज दिया गया था- बालेश प्रधानाध्यापिका उच्च प्राथमिक विद्यालय जलालपुर
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वर्जन-
मैंने यात्रा में बच्चों को भेजने से इंकार नहीं किया था, बल्कि मैंने खुद प्रधानाध्यापिका को फोन कर कक्षा 6, 7, 8 क्लास में पढ़ने वाले बच्चों को यात्रा में भेजने के लिए कहा था, क्योंकि स्कूल में बच्चे कम थे, यह शिक्षकों की कमी है। इस संबंध में प्रधानाध्यापिका ने मुझे पहले अवगत नहीं कराया। मैंने ग्राम प्रधान से भी बातचीत की है, आरोप निराधार है।- रसीद सिद्दकी एबीएसए बड़ौत।
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