बागपत। दादा चौधरी चरण सिंह व पिता चौधरी अजित सिंह की विरासत संभालने के बाद केंद्रीय राज्यमंत्री बनकर चौधरी जयंत सिंह एक कदम औॅर आगे बढ़ गए। इस तरह चौधरी परिवार में तीसरी पीढ़ी मंत्री बन गई और इसके साथ ही उनका कद भी बढ़ जाएगा।
चौधरी परिवार में चौधरी चरण सिंह सबसे पहले वर्ष 1977 में गृहमंत्री बने थे। उसके बाद 24 जनवरी से 16 जुलाई 1979 तक वित्त मंत्री रहे और उप प्रधानमंत्री भी रहे। उसके बाद प्रधानमंत्री भी रहे। उनके बाद बेटे चौधरी अजित सिंह वर्ष 1989 में पहली बार वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री बने। वह वर्ष 1995 में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री रहे तो वर्ष 2001 में कृषि मंत्री रहे। उसके बाद वह वर्ष 2009 में भाजपा के साथ चुनाव लडक़र सांसद बने तो तभी चौधरी जयंत सिंह भी मथुरा से सांसद बने थे। मगर वर्ष 2011 में भाजपा का साथ छोडक़र कांग्रेस के साथ गए और चौधरी अजित सिंह नागरिक उड्डयन मंत्री बने जो 2014 में चुनाव होने तक मंत्री पद पर बने रहे।
दस साल बाद विरासत और मंत्री पद दोनों मिले
बागपत को चौधरी परिवार की विरासत कहा जाता है। क्योंकि यहां से कई बार लगातार चौधरी चरण सिंह और चौधरी अजित सिंह सांसद रहे। मगर वर्ष 2014 में भाजपा के डा. सत्यपाल सिंह ने चौधरी अजित सिंह को हराकर यह सीट छीन ली थी। अब रालोद के डा. राजकुमार सांगवान के यहां से जीत दर्ज करने पर चौधरी परिवार को विरासत वापस मिल गई है और इसके सहारे केंद्र में मंत्री पद भी मिल गया है।
जयंत के मंत्री बनने से बागपत का बढ़ेगा कद
केंद्र में रालोद अध्यक्ष चौधरी जयंत सिंह के मंत्री बनने से किसी न किसी तरह से बागपत को भी फायदा होने की उम्मीद है। क्योंकि जयंत का नोडल जिला भी बागपत है और रालोद के लिए बागपत ही सबसे अहम जिला माना जाता है। यहां विकास कार्य काफी होने की उम्मीद है तो जयंत के मंत्री बनने से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों को भी फायदा मिलेगा।