बड़ौत। अगर आप अपने बच्चों को बहलाने के लिए मोबाइल फोन थमाते हैं तो तत्काल इस आदत को दूर कर लें। आपकी यह आदत आपके बच्चों के जीवन को नुकसान पहुंचा सकती है। चिकित्सकों के अनुसार मोबाइल की लत लगने से कई बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। मोबाइल से निकलने वाला रेडिएशन भी कई गंभीर बीमारियों की वजह होता है।
वरिष्ठ चिकित्सक डाॅ. दिनेश बंसल के अनुसार बच्चों को मोबाइल की लत बीमारी कर सकती है। इसलिए कोशिश करें कि बच्चों के सामने खुद भी मोबाइल न चलाएं और बच्चों को भी मोबाइल न दें। डाॅ. अनिल जैन का कहना है कि मोबाइल से निकलने वाला रेडिएशन बच्चों के लिए काफी नुकसानदायक होता है।
बच्चों को किताबों से जोड़ने का प्रयास करें
दिगंबर जैन डिग्री कॉलेज की मनोविज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. अंशु अग्रवाल का कहना है कि आजकल मां-पिता बच्चों को रोता देख उनके हाथ में मोबाइल थमा देते हैं। जब तक बच्चों के हाथ में मोबाइल रहेगा, वह खेलता रहेगा। जैसे ही मोबाइल लिया, बच्चा रोने लगता है। इसलिए परिवार में हंसी-मजाक का माहौल बनाएं और बच्चों को किताबों से जोड़ने का प्रयास करें और उन्हें आउटडोर गेम के लिए प्रेरित करें। इसके बाद भी अगर बच्चों में सुधार नहीं होता है तो मनोवैज्ञानिक से मदद लें।
बच्चों को बिना वजह मोबाइल न दें
सीएचसी अधीक्षक डाॅ. विजय कुमार का कहना है कि सीएचसी पर प्रतिदिन 50 से 60 बच्चे ऐसे आते है जिन्हें भूख नहीं लगती, चिडचिड़ापन और आंखों की शिकायत रहती है। उन्होंने अभिभावकों को सलाह दी कि बच्चों को बिना वजह मोबाइल न दें। बताया कि ज्यादा मोबाइल देखने से कई गंभीर बीमारियां हो सकती हैं।
ये बोले अभिभावक
- ज्यादा मोबाइल देखने से बच्चा चिड़चिडा हो गया था और जिद करने लगा था, मोबाइल न देने पर रोता था, खाना भी ढंग से नहीं खाता था। सीएचसी पर दिखाने के लिए गए तो उन्होंने यह कहकर जिला अस्पताल भेज दिया कि सीएचसी पर बाल रोग विशेषज्ञ नहीं है। - गरिमा
- ऑनलाइन क्लास के चलते अभिभावकों की बच्चों को फोन देने की मजबूरी हो गई है, लेकिन यह अभिभावकों की जिम्मेदारियां भी है कि वे देखे कि बच्चा पढ़ाई कर रहा है या मोबाइल में गेम्स खेल रहा है। कोशिश करें बच्चों को अधिक समय तक मोबाइल से दूर रखे। - शैली
- मोबाइल से निकलने वाले रेडियएशन से बच्चों की आंख में जलन, सिर दर्द, चिड़चिड़े हो जाते हैं। अभिभावकों की जिम्मेदारी है कि वे बच्चों के भविष्य को सुरक्षित बनाएं। - पंकज