बिनौली। बिनौली और सिरसलगढ़ गांव में सीआईपीएमसी देहरादून, आगरा से कृषि विशेषज्ञों की टीम ने गन्ने की फसल का निरीक्षण किया। उन्होंने किसानों को गन्ने की फसल में लग रहे पायरिला कीट से बचाव और रोकथाम के उपाय बताए।
बिनौली और सिरसलगढ़ के जंगल में किसानों की गन्ने की फसल में रोग लगने से फसल सूखनी शुरू हो गई है। किसान पूर्व प्रधान रामफल धामा, विनय धामा, मास्टर नरेंद्र धामा, देवेंद्र, विवेक, मोनू आदि किसानों ने इसकी शिकायत कृषि मंत्रालय और डायरेक्ट ऑफ प्लांट प्रोटेक्शन फरीदाबाद को दी।
शिकायत पर बृहस्पतिवार को सहायक कृषि वैज्ञानिक डॉ. सिमरन, डॉ. किरण नेगी, कृषि विशेषज्ञ डॉ. अनुराधा, डॉ. कमलेश तिवारी, राजेंद्र सिंह, निशांत अहलावत आदि गांव में पहुंचे। उन्होंने बताया कि पायरिला के लक्षण इनके अंडे पत्तियों की निचली सतह पर झुंड में सफेद रोमों से ढके रहते हैं। ग्रसित फसल की पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं।
रस चूसते समय यह कीट पत्तियों पर एक लसलसा सा पदार्थ छोड़ता है, जिससे पत्तियों पर काली फफूंद उगने लगती है। समूचे पत्ते काले पड़ने लगते हैं पौधों में प्रकाश संश्लेषण की क्रिया में बाधा पड़ने लगती है।
पायरिला से बचाव के लिए खेतों के आसपास खरपतवार न जमा होने दें। खेतों की सुबह-शाम निगरानी करते रहें। यदि गन्ने की पत्तियों में सफेद रूई नुमा धागे वाई के आकार संरचना दिखाई दे रही है तो इन्हें तत्काल काटकर जला दें। जब तक कीटों का प्रकोप है यूरिया का प्रयोग ना करें। हफ्ते में एक बार स्प्रे करने की सलाह दी।