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प्रसिद्धि चाहिए, तो सिद्धि प्राप्त करो : आचार्य विशुद्ध सागर

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फोटो संख्या 3
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बड़ौत। आचार्य विशुद्धसागर महाराज ने कहा कि जो समय की कीमत करते हैं, उनकी दुनिया कीमत करती है। जिसको समय का बोध होता है, वही दुनिया को बोध प्रदान करता है। सम्बोधन के लिए बोध होना चाहिए। बोध के बिना दिया गया उपदेश कल्याणकारी नहीं हो सकता है।
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महाराज जी रविवार को ऋषभदेव सभागार में आयोजित धर्मसभा को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि बोध के बिना शोध नहीं, शोध के बिना समाधि नहीं। बोध, बोधि, समाधि ही परम-शांति का आधार है। यश प्राप्त करना चाहते हो तो यशपूर्ण, यशस्वी, पवित्र संयम के साथ जीवन जियो। यदि रावण जैसा जीवन जियोगे, तो राम जैसा यश नहीं मिलेगा | कंस जैसा जीवन जियोगे, तो कृष्ण जैसी प्रसिद्धि नहीं मिलेगी। तुम दूसरों को सम्मान दोगे, तो दूसरे तुम्हारा सम्मान करेंगे। कुछ प्राप्त करना चाहते हो, तो देना भी सीखो। महत्त्व देना सीखो, तुम्हारा महत्त्व अपने आप बढ़ जाएगा। कुछ पाना चाहते हो, तो झुकना सीखो। जो झुक जाता है, वह उठ जाता है। उठना है, तो झुकना सीखो। गुरु को प्रसन्न करना है, तो प्रणाम कर लो। ब्राह्मण को धन दे दो तो वह प्रसन्न हो जाता है। व्यापारी से व्यापार कर लो, तो वह संतुष्ट हो जाता है। निर्धन को भोजन दे दो तो वह खुश हो जाता है। जनक- जननी की सेवा कर दो, तो वह आनन्दित हो जाते हैं। प्रजा को देख लो, तो वह शोक भूल जाती है। दुःखी से प्रिय-वचन बोल दो तो वह दुःख भूल प्यार से जाता है। सभा का संचालन डॉ़ श्रेयांस जैन ने किया। सभा में प्रवीण जैन, अतुल जैन, सुनील जैन, वरदान जैन, दिनेश जैन, विनोद जैन आदि शामिल रहे।
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