बड़ौत। विश्व सिर और गर्दन कैंसर दिवस हर साल 27 जुलाई को मनाया जाता है। यह आम जनता में सिर और गर्दन के कैंसर के बारे में जागरूकता बढ़ाने और हमारे समुदाय में इससे प्रभावित लोगों पर पड़ने वाले प्रभाव को स्वीकार करने का एक अवसर है।
कैंसर जानलेवा बीमारी है, इसके मरीजों का दायरा लगातार बढ़ रहा है। इससे बचाव को लेकर शासन व स्वास्थ्य विभाग के साथ-साथ निजी क्षेत्र में भी लगातार जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। मगर मरीजों का दायरा थमने के बजाय लगातार बढ़ रहा है। संकेतों की पहचान होने पर समय रहते कैंसर जैसी बीमारी का भी आसानी से इलाज हो सकता है। अक्सर सिर और गर्दन कैंसर की लोगों को समय पर जानकारी नहीं मिल पाती और जागरूकता के अभाव में जांच नहीं कराते हैं, जिसकी वजह से उन्हें परेशान होती है।
कैंसर रोग विशेषज्ञ डाॅक्टर राजेंद्र कुमार बताते हैं कि किसी भी रोग की पहचान होना भी उपचार का हिस्सा है। यह बहुत महत्वपूर्ण है कि हर कोई सिर और गर्दन के कैंसर के शुरुआती चेतावनी संकेतों को पहचान सके। उन्होंने बताया कि यदि किसी व्यक्ति के मुंह के छाले जो तीन सप्ताह तक ठीक नहीं होते, या मुंह में लाल व सफेद धब्बे होना, सिर या गर्दन पर गांठ या सूजन के अलावा लगातार स्वर बैठना होता है तो तुरंत अपने चिकित्सक से मिलना जरूरी है। जितनी जल्दी निदान किया जा सकता है, उतनी ही बेहतर संभावना है कि आप बीमारी को हरा पाएंगे, और आपकी जिंदगी की गुणवत्ता भी बेहतर होगी।
इनका सेवन न करें
- तंबाकू धूम्रपान
- अत्यधिक मात्रा में शराब पीना।
- चबाने वाला और धूम्ररहित तम्बाकू।