खेकड़ा। भैयादूज त्योहार के उपलक्ष्य में लोक साहित्य संस्कृति समिति खेकड़ा के कार्यालय पर बृहस्पतिवार को काव्य गोष्ठी का आयोजन किया। कवियों ने त्योहारों की महत्ता पर प्रकाश डाल सभी को भाव विभोर कर दिया।
कवि मयंक ने कहा कि प्यार मोहब्बत की बातें झूठ दिखाई देती हैं, हर आंगन में अब दीवार दिखाई देती है। कवि मुकेश कुमार ने कहा कि उनकी हर रात गुजरती है दीपावली की तरह, मैंने इक दीप जलाया तो बुरा मान लिया। कवि सुमित कुमार ने कहा कि भीड़ लगी बाजारों में पटाखे खरीद रहे, महंगाई बढ़ गई इतनी सब्जियां आंसू निकाल रही।
कवि गजेंद्र गजानन ने कहा कि कितनी बार मरे हो तुम कितनी बार मरे है हम, किस किसने बांटी कितनी खुशियां कितने गम। कवि आदित्य कुमार ने कहा कि बहन की खातिर रावण सर्वस्व लूटा बैठे, कौन सुरक्षा करे बहनों की घर घर आज दुशासन बैठे। कवि दीपक कुमार ने कहा कि नेता जी ने राष्ट्र पिता से किए प्रश्न हजार, आजादी की खुशहाली पर ये कैसे प्रहार।
कवि परीक्षित शर्मा ने कहा कि रक्षा बंधन, भैयादूज संस्कृति में बहुत जरूरी है, भाई बहन का प्यार जगत में रहना बहुत जरूरी है। कवि नरेंद्र कुमार ने कहा कि देश में ना हो लड़ाई राम रहीम दोनों भाई, राम राज जैसा यहां राज बनाओ मिलकर सभी भाई। इस दौरान अनेक कवि और श्रोता मौजूद रहे।