बड़ौत। कथा व्यास दिनेश चंद पांडे ने कहा कि तपस्या और साधना करने से भगवान खुश हो जाते हैं, इसलिए सुबह और शाम जरूर भगवान का स्मरण करना चाहिए। कथा व्यास ने कर्दम ऋषि की कथा का वर्णन किया।
बताया कि कर्दम ऋषि ने घोर तप की, जिससे भगवान प्रसन्न हुए और उनके प्रेम से आंसू निकले, जिनसे सरोवर बना। जिसे बिंदु सरोवर के नाम से जानते हैं, यह गुजरात में स्थित है। मनु महाराज की पुत्री देवहूति विवाह योग्य हुईं तो उन्होंने भगवान से अच्छे वर की प्रार्थना की, तब भगवान ने उन्हें कर्दम ऋषि से विवाह करने के लिए कहा और कर्दम ऋषि की तपस्या से प्रसन्न होकर कहा मैं प्रसन्न हूं, तुम सृष्टि के निर्माण के लिए तप कर रहे हो, तुम्हारा मनोरथ पूर्ण होगा। तुम महाराज मनु की पुत्री से विवाह करो, महाराज मनु अपनी पत्नी सतरूपा एवं पुत्री देवहूति के साथ कर्दम ऋषि के आश्रम पहुंचे, तब कर्दम ऋषि ने उन्हें बैठने के लिए 3 आसन दिए। कर्दम ऋषि ने विवाह से पूर्व शर्त रखी, जब देवहूति गर्भवती होंगी, मैं सन्यास लेकर वन चला जाऊंगा। जिस पर माता शतरूपा ने पुत्री की ओर देखा, उनकी मौन स्वीकृति से विवाह किया गया। देवहूति द्वारा पति की सेवा की गई, जिससे कर्दम ऋषि ने वर मांगने को कहा, तब उन्होंने कहा आप वन को तब जाएं, जब मुझे पुत्र प्राप्त हो। कर्दम ऋषि को प्रथम नौ संताने कन्या हुई, 10 वीं संतान भगवान कपिल देव के रूप में प्राप्त हुई। जिन्होंने सांख्य शास्त्र का उपदेश किया। कर्दम ऋषि वन को चले गए। श्रीमद्भागवत महापुराण के पांचवें दिन व्यासपीठ पूजन अमित गर्ग, डॉक्टर अखिलेश शर्मा द्वारा किया गया। कथा श्रवण करने वालों में अतुल गुप्ता, सुशील गुप्ता, हरिशंकर अग्रवाल, कालीचरण, दिनेश गोयल आदि रहे।