फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

क्षमा आत्मा का मूल स्वभाव है : प्रदीप शास्त्री

विज्ञापन
विज्ञापन
बिनौली। बरनावा के श्री चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर में चल रहे 41 दिवसीय शांतिनाथ विधान में बुधवार को श्रद्धालुओं ने पूजा कर श्रीफल अर्पित कर क्षमा धर्म को धारण किया।
विज्ञापन

विधान में पंडित प्रदीप पीयूष शास्त्री जबलपुर ने दश धर्मों के प्रथम सोपान क्षमा धर्म के पावन प्रसंग पर श्री 1008 चंद्रप्र्रभु भगवान की महान विधिवत संपन्न कराई। दश धर्मों में उत्तम क्षमा धर्म प्रथम धर्म है। क्षमा आत्मा का मूल स्वभाव है। फिर भी अनादिकाल से हमारी आत्मा को क्षमा की जगह क्रोध सब और से अविष्टित किए हुए हैं। क्रोध-कषाय की सबसे बड़ी विशेषता यह होती है कि वह प्रकट होने के पूर्व हमारे विवेक को पूर्ण रूप से दबोच लेता है। हमें हित-अहित का विचार करने का इस विषय में कुछ सोचने का मौका नही देता। मौके पर पर बादामी देवी जैन, लता जैन, रुकमणी जैन, सुनीता जैन, सीता जैन, ललित जैन, मुकेश जैन, महेश जैन मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें