यमुना का जलस्तर बढ़ने से किसान चिंतित
बड़ौत। यमुना का जलस्तर बढ़ने से किनारे स्थित खेतों में फसल को नुकसान होने की आशंका को लेकर किसानों की चिंता बढ़ने लगी है। हालांकि अभी तक क्षेत्र में कहीं से भी फसल को नुकसान होने की कोई सूचना नहीं है।
जनपद में खेड़ा हटाना, कोताना, टांडा, कूड़ी, छपरौली, बदरखा, ककौर, शबगा, लुहारी, राजपुर, खामपुर के अलावा सिसाना, काठा, नंगला बहलोलपुर, गौरीपुर, नैथला समेत अन्य गांवों के किसानों यमुना खादर में हजारों बीघा भूमि पर गन्ना, ज्वार के अलावा मिर्च, लौकी, टमाटर, भिंडी सहित अन्य सब्जियों की फसल उगाई है। पहाड़ों पर हो रही बारिश और हथिनीकुंड बैराज से पानी छोड़े जाने के बाद यमुना का जलस्तर बढ़ गया है। जिससे किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है।
कोताना के किसान रामबीर, जागोस के किसान अनिल, देवेंद्र, रामकुमार का कहना है कि हर साल यमुना का जल स्तर बढ़ने से लाखों रुपये की गन्ने, ज्वार के अलावा सब्जियों की फसल को नुकसान पहुंचता है। खामपुर गांव के किसान जयवीर, राजपुर के किसान संजीव, भंवर सिंह, रामफल कश्यप आदि का कहना है कि हथिनीकुंड बैराज से लगातार पीनी छोडे़ जाने से उनकी फसल तक भी पानी पहुंच जाएगा। जलस्तर बढ़ने से भूमि का कटान भी शुरू हो गया है। लोगों ने कि जलस्तर बढ़ने से उनकी सैकड़ों बीघा ईख, मक्का, ज्वार, मिर्च, लौकी, टमाटर व भिंडी आदि की फसल बर्बाद हो जाएंगी।
इस संबंध में एसडीएम सुभाष सिंह का कहना है कि विभागीय अफसरों से बातचीत कर समस्या का समाधान निकालने का प्रयास किया जा रहा है। बताया कि अभी जलस्तर की स्थिति सामान्य है। बारिश होने के बाद यमुना नदी का जलस्तर जरूर बढ़ा है, लेकिन फसलों के बर्बाद होने की सूचना नहीं आई है, भूमि कटान की शिकायत किसान कर रहे हैं। मामला दिखवाया जा रहा है।