बड़ौत। पॉलीटेक्निक संस्थाओं में प्रवेश लेने को लेकर लगातार युवाओं को रूझान कम होता जा रहा है। यही कारण है कि काउंसिलिंग प्रक्रिया के आठ चरण पूरे होने के बावजूद अभी भी अधिकांश सीटें खाली पड़ी हैं।
बृहस्पतिवार को पॉलीटेक्निक कॉलेजों में दाखिला लेने के लिए आठवें चरण का अंतिम दिन था। आठ चरण पूरे होने के बाद भी कुछ ट्रेड्स ऐसी हैं, जिनमें दाखिले ना के बराबर हुए हैं। इनमें डेरी इंजीनियरिंग सबसे अग्रणी है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि इसमें दाखिला लेने वाले छात्रों का रुझान बहुत कम देखने को मिल रहा है। क्योंकि इस ट्रेड का प्रचार भी न के बराबर है। यह ट्रेड कोताना गांव में स्थित राजकीय पॉलीटेक्निक में हैं, जहां पर 75 में से केवल 10 दाखिले ही लॉक किए जा सके हैं।
पॉलीटेक्निक में छात्रों के होते जा रहे मोहभंग को लेकर शिक्षाविदों का मानना है कि इस बार संयुक्त प्रवेश परीक्षा ऑनलाइन हुई थी और ज्यादातर देहात क्षेत्र से दसवीं परीक्षा करने वाले छात्र ऑनलाइन परीक्षा देने से कतराते हैं। इसके अलावा पॉलीटेक्निक कॉलेजों में संसाधनों का अभाव तथा पॉलीटेक्निक करने के बाद भी रोजगार के अवसरों में कमी इस बात का मुख्य कारण है। छात्रों के कम रुझान को लेकर शिक्षक भी परेशान है।
कोताना गांव के राजकीय पॉलीटेक्निक कॉलेज के प्रधानाचार्य लखमीचंद ने बताया कि कॉलेज में सिविल इंजीनियरिंग में आठ सीटें, मेकेनिकल इंजीनियरिंग (ऑटोमोबाइल) में आठ सीटें, डेरी इंजीनियरिंग में 65 सीटें रिक्त चल रही हैं।