पर्यावरण दिवस पर विशेष
- जिले में पिछले साल साढ़े दस लाख पौधे लगाने का किया गया था दावा, उनमें केवल ढ़ाई लाख बचे
- औद्योगिक क्षेत्र, पुलिस लाइन, बड़ौत तहसील, बड़ौत-मुजफ्फरनगर मार्ग और छपरौली मार्ग पर लगाए पौधे गायब हो गए
फोटो चार की सीरिज
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। यहां हर साल हरियाली के लिए लाखों रुपये खर्च करके लाखों पौधे लगाए जाते हैं। लेकिन यहां जमीन की जगह केवल कागजों में हरियाली रहती है। पिछले साल भी करीब साढ़े दस लाख पौधे लगाए गए थे जो अफसरों की लापरवाही की खाद से सूख गए है। क्योंकि उनकी कोई देखरेख नहीं की गई और पानी तक नहीं दिया गया। इस तरह केवल सरकार का पैसा बर्बाद किया जा रहा है।
यहां पिछले साल जुलाई में वन महोत्सव मनाया गया और इसका शुभारंभ बालैनी के वाल्मीकि मंदिर में राज्यमंत्री दानिश आजाद अंसारी समेत अधिकारियों व नेताओं ने पौधरोपण करके किया था। इसके साथ ही सभी सरकारी विभागों के अधिकारियों व कर्मियों को पौधरोपण का लक्ष्य दिया गया था। अधिकारियों ने दावा किया था कि अभियान के तहत दस लाख 45 हजार 301 पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया था और उसके सापेक्ष दस लाख 56 हजार 497 पौधे लगाने का दावा किया गया। लेकिन जिन जगहों पर पौधे लगाने की बात कही गई थी, वहां अब कोई पौधा नहीं दिखता है। अफसरों ने उन पौधों में लापरवाही की ऐसी खाद लगाई कि न उनकी देखरेख की गई और न उनको पानी दिया गया। जिससे वह सूख गए और अब उन जगहों पर एक भी पौधा दिखाई नहीं देता है। वहीं कागजों में आज भी खूब हरियाली है और एक भी पौधा नहीं सूखा है। ऐसे में पर्यावरण को किस तरह से बेहतर किया जा सकता है, इसका अंदाजा खुद लगाया जा सकता है।
इन जगहों पर सूख गए पौधे
बालैनी के वाल्मीकि मंदिर परिसर, मेरठ-बागपत नेशनल हाईवे के डिवाइडर, पुलिस लाइन, अस्पताल के पार्क, बीएसए कार्यालय के बाहर, मेरठ-बड़ौत मार्ग किनारे, सीएचसी बागपत, बड़ौत तहसील, बड़ौत-मुजफ्फरनगर मार्ग, बड़ौत-छपरौली मार्ग समेत अन्य जगह लगाए गए पौधे देखरेख के अभाव में सूख गए।
यह है जंगल क्षेत्र की स्थिति
यहां वन परिक्षेत्र में पुरा महादेव, मवीकलां, बरनावा, संतनगर, बामनौली, बरदखा, छपरौली सहित विभिन्न गांवों के 15 जंगल शामिल होते हैं। इनमें 40 हजार के आसपास हरे वृक्षों का संरक्षण विभागीय अधिकारियों द्वारा किया जाता है। इन वृक्षों की संख्या अब से दस साल पहले तक 60 हजार से अधिक हुआ करती थी, लेकिन इनको भी काटा जा रहा है। वन क्षेत्र में भी पौधरोपण किया जाता है। लेकिन ट्री गार्ड टूटे पड़े हुए है, हर साल लगाए जाने वाले पौधों की देखभाल नहीं होती। जिस कारण हर साल लाखों पौधे गर्मी की तपिश और प्रदूषण की भेंट चढ़ जाते हैं। इस बार भी 13 लाख से अधिक पौधों के रोपण का लक्ष्य मिला है और हालात पिछले साल से जुदा नहीं दिख रहे है।
वर्जन.........
पिछले साल जितने भी पौधे लगवाए गए थे, उनकी देखरेख की जिम्मेदारी भी संबंधित विभागों को दी गई थी। अगर देखरेख के अभाव में पौधे सूख गए है या वहां नहीं है तो उसको दिखवाया जाएगा और जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई होगी। - हेमंत कुमार सेठ, जिला वन अधिकारी