बड़ौत। दिगम्बर जैनाचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज ने कहा है कि सबके दिन एक से नहीं होते। दिन बदलते देर नहीं लगती। जिंदगी में कब किसके साथ क्या हो जाय पता नहीं। इसलिए भूलकर भी किसी का तिरस्कार न करें।
महाराज रविवार को ऋषभदेव सभागार में आयोजित धर्मसभा में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि श्रीराम को राज्य मिलने वाला था, उसी दिन बनवास हो गया। श्रीकृष्ण का जन्म जेल में हुआ। सती सीता को गर्भवती अवस्था में वन में छोड़ दिया गया। दिन बदलते देर नहीं लगती। देखते ही देखते समय बदल जाता है। रावण ने सीता का हरण कर लिया था, परन्तु फिर भी सीता श्रीराम की ही कहलाती थी। आप हरण तो कर सकते हो, वस्तु छीन सकते हो, पर अपनी बना नहीं सकते हो। ऐसे ही हमारा गिरनार तीर्थ कुछ लोग छीनना चाहते हैं, वह छीन सकते हैं, पर गिरनार जैनों का था, है और रहेगा। जिंदगी संभल-संभल कर जियो। भूलकर भी किसी का तिरस्कार मत करो। कब किस पर कौन-सी विपत्ति आ जाये, कुछ पता नहीं। सभा का संचालन पंडित श्रेयांस जैन ने किया। इस दौरान दिगंबर जैन महासभा एवं निर्ग्रंथ जैन पाठशाला के सौजन्य से पाठशाला के शिक्षकों और बच्चों का सम्मान किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अनिल जैन रहे, चित्र अनावरण संतोष, सीमा जैन, द्वारा किया।
दीप प्रज्ज्वलन आदिश जैन द्वारा किया गया। स्वागत अध्यक्ष प्रशांत जैन गाजियाबाद द्वारा अतिथियों का सम्मान किया गया। सभा में दिनेश जैन, वैभव जैन, नरेंद्र जैन, अशोक जैन, रुचिका जैन, नीरू जैन, डिंपल जैन, रश्मि जैन शामिल रहे।