बड़ौत। वाजिदपुर गांव के पास इकॉनमिक कॉरिडोर निर्माण का कार्य अभी कुछ ओर महीने जारी रहेगा, लेकिन इसके बावजूद विभागीय अफसरों ने बरसात के मौसम में यहां पर मौत के गड्ढे खोदकर छोड़ दिए है। हैरानी की बात यह है कि खोदे गए गड्ढ़ों के पास न तो किसी तरह की बैरिकेडिंग लगी है और न ही सांकेतिक बोर्ड। नतीजन घोर लापरवाही के चलते दो मासूम बच्चों की दर्दनाक मौत हो गई। बच्चों की मौत से जहां परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो रहा है, वहीं एक साथ दो बच्चों की मौत से गांव में मातम छाया हुआ है।
खेल-खेल में नहाते हुए गड्ढे तक पहुंचे ओर डूब गए
बड़ौत। चारों बच्चे खेलते-खेलते इकॉनोमिक कॉरिडोर निर्माण में पिलर के खोदे गए गहरे गड्ढे में गिरकर डूब गए। उन्हें नहीं पता था कि उनकी मौत आ जाएगी। बच्चों की मौत से परिजनों में कोहराम मचा हुआ है।
गांव में पसरा मातम
एक साथ दो बच्चों के डूबने से हुई मौत से गांव में मातम का माहौल है। परिजनों ने बताया कि शाम के समय बरसात बंद होने के बाद बच्चे घर से थोड़ी दूर खेलने के लिए निकले, तो अंदाजा ही नहीं था कि ऐसा हादसा हो जाएगा। अब सभी का रो रोकर बुरा हाल है तो वहीं उस घड़ी को कोस रहे थे, जब बच्चे घर से निकले थे।
परिवार के लाड़ले थे चांद और लविश
बड़ौत। लोगों ने बताया कि मृतक बच्चों में चांद और लविश के पिता ई-रिक्शा चलाकर मेहनत मजदूरी कर परिवार चलाते हैं। दोनों ही बच्चे अपने परिवार में सभी के लाडले थे। बच्चों की मौत से भाई और बहनों का रो-रोकर बुरा हाल है। लोग परिवार को ढांढस बंधा रहे हैं।
कक्षा दूसरी में पढ़ता था चांद, लविश था कक्षा तीसरी का छात्र
बड़ौत। मृतक चांद (7) पुत्र सहदेव कक्षा दूसरी का छात्र था। उसके दो छोटी बहनें हैं। जिनमें से एक की उम्र 3 साल और दूसरी की उम्र 2 साल है। पिता सहदेव ई रिक्शा चलाते हैं। वहीं मृतक बच्चा लविश (9) पुत्र संदीप तीसरी कक्षा का छात्र था। उसका एक बड़ा भाई 11 साल का है और एक छोटी बहन पांच साल की है। पिता संदीप भी ई रिक्शा चलाकर परिवार का पालन-पोषण करता है।
नहाने से पहले खाई जामुन, फिर समा गए मौत के गडढे में
बड़ौत। चारों बच्चों घर से निकलने के बाद पहले हाईवे के पास खड़े जामुन के पेड़ के पास पहुंचे, जहां पर चारों बच्चों में निहाल, कुनाल, चांद और लविश ने जामुन खाई, फिर चारों गड्ढों में नहाने लगे और डूबने से दो बच्चों में चांद और लविश की मौत हो गई। जबकि उनके दोनाें दोस्त निहाल और कुनाल यह अंदाज भी नहीं लगा पाए कि उनके साथ क्या हो रहा है। काफी देर बाद शोर मचाए जाने पर ग्रामीण उन्हें बचाने के लिए दौड़े, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी।
लोहडड़ा गांव के पास इकोनामिक कॉरिडोर में बने गड्ढों में भरे पानी में बच्चों की तलाश करते ग्रामी