बागपत। यहां ढिकौली एक ऐसा गांव है, जिसने देश की आजादी में अहम भूमिका निभाई तो पाकिस्तान और चीन के साथ हुए युद्ध में अपना लोहा मनवाया। गांव के एक हजार से ज्यादा युवा सेना और अर्द्धसैनिक बलों में रहकर देश सुरक्षा कर रहे है। यह युवा मेजर, कर्नल, लेफ्टिनेंट, ब्रिगेडियर समेत सभी पदों पर तैनात है।
जिला मुख्यालय से करीब 15 किमी दूर 20 हजार की आबादी वाले ढिकौली को फौजियों का गांव भी कहा जाने लगा है। गांव को पहले स्वतंत्रता सेनानियों के नाम से जाना जाता था और अंग्रेजों के खिलाफ ग्रामीणों ने मोर्चा खोलते हुए खदेड़ दिया था। यहां के युवाओं में सेना में जाकर देश सुरक्षा करने का जज्बा रहता है। यही कारण है कि एक हजार से ज्यादा युवा सेना और अर्द्धसैनिक बलों में तैनात है। इनके अलावा करीब 600 युवा यूपी और दिल्ली पुलिस में नौकरी कर रहे हैं।
हर जंग में शामिल रहा ढिकौली
मेजर जनरल सुरेंद्र सिंह ढ़ाका ने 1965, 71, 99 की जंग लड़ी थी। बिग्रेडियर रणबीर सिंह ने 1965, 71 की जंग लड़ी। बिग्रेडियर महेंद्र सिंह ने 1965, 71 की जंग में लोहा मनवाया। कर्नल बलवान सिंह ढाका, कर्नल सतेंद्र ढ़ाका, कर्नल ओमबीर ढ़ाका, कर्नल बलजोर ढ़ाका ने 1965, 71 की जंग लड़ी थी। इनके अलावा कैप्टन महाराज सिंह ढ़ाका और कैप्टन राजसिंह ढ़ाका ने 1965, 71, 99 की जंग लड़ी थी। कैप्टन राजसिंह को 1965 की जंग में मृतक समझकर मोर्चरी भेज दिया गया था, लेकिन उनको दो दिन बाद होश आया। सूबेदार मेजर बलजोर ढ़ाका और मेजर यशपाल सिंह ने 1962, 65, 71 की जंग लड़ी थी।
गांव में यह रहे स्वतंत्रता सेनानी
आजाद हिंद फौज में गांव के लहरी सिंह, दिलावर सिंह, कालू देवराज, जिले सिंह, आलम सिंह, खजूरिंग सिंह, भीम सिंह, नादान सिंह, स्वतंत्रता सेनानी भारत सिंह, रामरिक, गिरवर सिंह, बनारसी, बलबीर पंडित, वेद गुजराती आदि रहे।
देश के लिए जंग लड़ते हुए शहादत भी मिली
ढिकौली के हवलदार हरपाल ढ़ाका और सौराज सिंह ढ़ाका 1965 में पाकिस्तान से जंग में शहीद हुए थे। धर्मपाल सिंह 1984 अमृतसर में देश सुरक्षा के लिए लड़ते हुए शहीद हुए। सुरेंद्र ढ़ाका 1999 में कारगिल युद्ध में शहीद हुए थे।
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गांव में 500 अधिवक्ता, शिक्षा से विदेशों तक पहुंचे
ढिकौली गांव में 500 से अधिक अधिवक्ता है। यहां के अधिवक्ता जिला न्यायाल, हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट में वकालत कर रहे है। कई न्यायाधीश भी हैं। वहीं 200 से अधिक युवा अमेरिका, कनाडा, यूरोप में पहुंचकर शिक्षा ग्रहण कर रहे है। ज्यादा सबसे कनाडा व अमेरिका में शिक्षा लेने के लिए युवा पहुंच रहे हैं।
युवाओं में सेना में भर्ती होकर देश की सुरक्षा व सेवा करने का जज्बा बहुत है। गांव को अब फौजियों के गांव के नाम से जाना जाता है। माता पिता का भी यही सपना है कि उनके बच्चे पढ़ लिखकर सेना में भर्ती होकर अपने देश की रक्षा करे। - संदीप ढ़ाका, ग्राम प्रधान
ढिकौली गांव के हर युवा का यही सपना होता है कि वह देश सेवा के लिए सेना में जाए। मेरे पिता सेना में कैप्टन थे और मेरे भाई सुरेंद्र सिंह, मेहर सिंह, भतीजा संजीव अभी सेना में रहकर देश सेवा कर रहे है। ऐसे कई परिवार है, जिनके कई लोग सेना में है। - ओमवीर ढ़ाका, ढिकौली