फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

श्रद्धालुओं ने उत्तम त्याग धर्म की पूजा की

विज्ञापन
विज्ञापन
बड़ौत। जैन मंदिरों में बुधवार को जैन श्रद्धालुओं ने उत्तम त्याग धर्म की पूजा की गई। जिनालयों में विधिवत विधानों की क्रियाएं संपन्न कराई गईं।
विज्ञापन

अजितनाथ सभागार में मुनि विशुभ्र सागर महाराज और मुनि विश्वार्क सागर महाराज के सानिध्य में चल रहे दशलक्षण पर्व के आठवें दिन श्री पंच परमेष्ठि विधान का आयोजन किया। श्रद्धालुओं ने उत्तम त्याग धर्म को अंगीकार किया। सुबह पीत वस्त्रधारी इंद्रगणों ने जिनेंद्र भगवान की प्रतिमा का गर्म प्रासुक जल से अभिषेक किया।
शांतिधारा का सौभाग्य सौधर्म इंद्र राजेश कुमार विभोर जैन को प्राप्त हुआ। इसके बाद नंदीश्वर दीप पूजन, भगवान शांतिनाथ पूजन, दशलक्षण पूजन और आचार्य विमर्श सागर महा मुनिराज की पूजा की गई। सौधर्म इंद्र विभोर जैन ने मंडल पर 144 अर्घ्य अर्पित किए। विधानाचार्य पंडित राजकिंग ने उत्तम त्याग धर्म के महत्व के संबंध में समझाया और सभी को अपने जीवन में कुछ न कुछ त्याग करने की प्रेरणा दी।
विज्ञापन

विकार भावों का आत्मा से छूटना ही त्याग है : मुनि विशुभ्र महाराज
बड़ौत। विधान में प्रवचन देते हुए मुनि विशुभ्र सागर महाराज ने कहा कि आत्म शुद्धि के उद्देश्य से विकार भाव छोड़ना तथा स्व-पर उपकार की दृष्टि से धन आदि का दान करना त्याग धर्म है। अत: भोग में लाई गई वस्तु को छोड़ देना भी त्याग धर्म है।
उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक दृष्टि से राग, द्वेष, क्रोध, मान आदि विकार भावों का आत्मा से छूट जाना ही त्याग है। उससे नीची श्रेणी का त्याग धन आदि से ममत्व छोड़कर अन्य जीवों की सहायता के लिए दान करना है। दान देते समय दाता के हृदय में न तो क्रोध की भावना आनी चाहिए, न अभिमान जाग्रत होना चाहिए।
सभा में सुभाष जैन, मुकेश जैन, प्रदीप जैन, वरदान जैन, राकेश जैन, सुधीर जैन, मनोज जैन, हंस कुमार जैन उपस्थित रहे। शाम सात बजे से सभागार में प्रतिक्रमण, आरती और उसके बाद युवा जैन मिलन वर्धमान के सौजन्य से जादूगर सम्राट वर्मा का मैजिक शो को बच्चों ने खासा पसंद किया। मीडिया प्रभारी वरदान जैन ने बताया कि बृहस्पतिवार को अजितनाथ सभागार में रात्रि आठ बजे से जैन तीर्थ यात्रा संघ के सौजन्य से भजन संध्या की प्रस्तुति की जाएगी। नौ सितंबर को विमर्श जागृति मंच के सौजन्य से अखिल भारतीय विराट कवि सम्मेलन होगा।
पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में नवग्रह शांति विधान का आयोजन
बड़ौत। शहर के नेहरू रोड स्थित पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में बुधवार को नवग्रह शांति विधान का भव्य आयोजन किया। सौधर्म एसके जैन ने भगवान पारसनाथ को पांडुशिला पर विराजमान कर अभिषेक किया। ईशान इंद्र सतेंद्र जैन दीपक जैन एवं इंद्रगणों ने भगवान पारस नाथ, शांतिनाथ भगवान और महावीर भगवान का अभिषेक किया। उसके बाद सौधर्म इंद्र एसके जैन और ईशान इंद्र दीपक जैन, शुभम जैन और अरिहंत जैन ने शांति धारा की। इंद्र-इंद्राणियों ने श्री जी की संगीतमयी आरती कर श्रीजी को पांडुकशिला से उनकी वेदिका में विराजमान किया।
विज्ञापन

पंडित नेम चंद जैन ने दैनिक पूजा कराई। श्रद्धालुओं ने मांडले पर नवग्रह शांति विधान के लिए 24 अर्घ्य समर्पित किए। संध्या के समय पारस नाथ भगवान, पंच परमेष्टि, नवग्रह शांति विधान की आरती 108 दीपकों से की गई। मौके पर सतेंद्र जैन, नरेश चंद जैन, संयम जैन, मुकेश जैन, राजीव जैन, राजीव जैन, अनिल जैन मौजूद रहे।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें