रटौल। ढिकौली गांव के भंडिया वाला शिव मंदिर में श्रद्धालुओं की अटूट आस्था है। ग्रामीणों के अनुसार इसका इतिहास करीब पांच हजार साल पुराना है और गांव में भांडा नाम के ऋषि ने तपस्या की थी। उन्हीं के नाम पर गांव के तालाब और मंदिर का यह नाम पड़ा। ग्रामीणों का कहना है कि गांव का मंदिर लोगों के लिए आस्था का केंद्र है।
मंदिर में शिव परिवार के अलावा शनि देव, बालाजी, राधा-कृष्ण, शेरावाली, काली माता, भैरोबाबा की मूर्ति स्थापित है। मंदिर में पीपल, बरगद और गुल्लर के वर्षों पुराने पेड़ और कई ऋषियों की समाधि है। जूना अखाड़े के महंत सोमनाथ 20 साल से मंदिर में रह रहे है। महंत बताते है मंदिर में बड़ा और प्राचीन तालाब है। मान्यता है कि तालाब में स्नान करने से दाद, खाज, खुजली और कुष्ठ रोग से राहत मिलती है।
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दूर-दराज से आते है श्रद्धालु
मंदिर में श्रावण के महीने में गांव के अलावा अन्य राज्य के श्रद्धालु भगवान आशुतोष का जलाभिषेक करने के लिए मंदिर में पहुंचते है। ग्रामीणों के अनुसार मंदिर में दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान श्रद्धालु पूजा करने के लिए पहुंचते है।
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-गांव के तालाब किनारे भांडा ऋषि शिवलिंग की पूजा करते थे। उन्हीं के नाम पर मंदिर और तालाब का नाम भण्डिया रखा गया। मंदिर की मान्यता दूर-दूर तक है। श्रावण के महीने में यहां दूसरे राज्यों के श्रद्धालु भगवान आशुतोष जलाभिषेक करने के लिए पहुंचते है। -जीत सिंह ढाका
भांडा ऋषि के नाम से ही प्राचीन शिव मंदिर के पास के तालाब का नाम भण्डिया तालाब पड़ा। मान्यता है तालाब में नहाने से दाद, खाज, खुजली और कुष्ठ रोग से राहत मिलती है। दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालु तालाब में नहाते है। -संदीप ढाका, ग्राम प्रधान