बागपत। जहां अभी तक रालोद अध्यक्ष चौधरी जयंत सिंह के बागपत और उनकी पत्नी चारू चौधरी के मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट से चुनाव मैदान में उतरने के कयाए लगाए जा रहे थे। इसे लेकर खुद चौधरी जयंत सिंह ने स्थिति स्पष्ट की है कि वह चुनाव लड़ेंगे या नहीं, इस पर जल्द निर्णय लिया जाएगा। हालांकि चारू चौधरी अभी चुनाव लड़ने की राजनीति से दूर रहेगी।
चौधरी जयंत सिंह का लोकसभा चुनाव के बाद भी राज्यसभा का कई साल का कार्यकाल बाकी रहता है तो उनके कंधों पर कई सीटों पर प्रत्याशियों के लिए चुनाव प्रचार की जिम्मेदारी रहेगी। वहीं अपनी परंपरागत सीट बागपत से किसी अन्य को चुनाव मैदान में उतारना सही नहीं माना जा रहा है। क्योंकि इस सीट को चरण सिंह और अजित सिंह के नाम से जाना जाता है।
इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए जयंत ने खुद के चुनाव लड़ने का फैसला परिस्थितियों के अनुसार लेने की बात कही है। जिसके लिए पहले राजनीतिक लोगों से चर्चा होगी। हालांकि पत्नी चारू चौधरी को इस बार चुनाव मैदान में उतारने से जयंत ने साफ इंकार कर दिया है। उन्होंने कहा कि काफी कार्यकर्ता हैं, जिन्हें चुनाव लड़वाया जाएगा।
पश्चिमी यूपी के हर गांव व घर तक पहुंचने की रणनीति
चौधरी जयंत सिंह के अनुसार जिस तरह से किसान अपने खेत पर नजर रखता है, उसी तरह वह बागपत समेत आसपास के जिलों के लोगों को अपने परिवार की तरह मानते है और वहां नजर रखने के साथ ही मिलते रहते हैं। क्योंकि चौधरी चरण सिंह व अजित सिंह के समय में परिवार के इन लोगों के फैसले ही सरकार में चलते थे। अब ऐसी सरकार हो गई है जो आम लोगों के फैसले नहीं मानती। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव का समय कम रह गया है और वही पुराना समय चाहिए तो विचार करना होगा। किसी को जाटलैंड के चक्रव्यूह में नहीं फंसना है, बल्कि किसान और हर बिरादरी की बात करनी है। भाजपा के साथ पैसे वाले वर्कर है, इसलिए 2024 की जिम्मेदारी बांट लो और हर गांव व हर घर तक पहुंचना है।