बागपत। सीएचसी पर अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था नहीं है। जिससे सीएचसी पर आने वाले मरीजों को जिला अस्पताल की दौड़ लगानी पड़ती है। जिला अस्पताल में एक अल्ट्रासोनोलॉजिस्ट की तैनाती है, जिससे मरीजों को अगले दिन की तारीख दी जाती है। क्योंकि जिला अस्पताल में एक दिन में केवल 70 अल्ट्रासाउंड किए जाते है, जबकि वहां रोजाना 200 से अधिक मरीज पहुंचते हैं।
सीएचसी पर सिर्फ एक्स-रे की सुविधा उपलब्ध है। सीएचसी पर आने वाली गर्भवती महिलाओं और अल्ट्रासाउंड के मरीजों को जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया जाता है। जिला अस्पताल में एक ही अल्ट्रासोनोलॉजिस्ट होने के कारण अल्ट्रासाउंड कराने के लिए मरीजों की भीड़ लगी रहती है। अस्पताल में आने वाले मरीजों को घंटों तक इंतजार करने के साथ ही तारीख दे दी जाती है। जिससे मरीजों को या तो प्राइवेट सेंटर पर अल्ट्रासाउंड कराना पड़ता है या फिर अगले दिन आने के लिए विवश होना पड़ता है।
एक दिन में सिर्फ 70 मरीजों के ही किए जाते हैं अल्ट्रासाउंड
जिला अस्पताल में रोजाना 200 से अधिक मरीज अल्ट्रासाउंड के लिए पहुंचते है, जबकि एक दिन में केवल 70 मरीजों का अल्ट्रासाउंड किया जाता है, जिससे अन्य मरीजों को दूसरे दिन की तारीख देकर वापस भेज दिया जाता है। जिससे अस्पताल में आने वाले मरीजों को कई-कई दिन तक इंतजार करना पड़ता है।
तीन दिन से लगा रही चक्कर
जिला अस्पताल पहुंची नौरोजपुर की पुष्पा ने बताया कि उसे अपने बेटे अर्चित का अल्ट्रासाउंड कराना है। पिछले तीन दिन से अल्ट्रासाउंड कराने के लिए चक्कर लगा रही है। उसे रोजाना अगले दिन की तारीख दी जाती है। इस कारण उसका बेटा तीन दिन से स्कूल भी नहीं जा पा रहा है।
चार घंटे तक करना पड़ा इंतजार
जिला अस्पताल पहुंचे शरफाबाद के मेहराज ने बताया कि उसकी पत्नी की तबीयत खराब है। चिकित्सक ने उसे इमरजेंसी में अल्ट्रासाउंड कराने के लिए कहा था। इमरजेंसी लिखने के बाद भी वह सुबह आठ बजे से अपने नंबर का इंतजार कर रहा है। चार घंटे बाद उसकी पत्नी का अल्ट्रासाउंड किया गया।
जिला अस्पताल में रोजाना 70 अल्ट्रासाउंड कराए जा रहे है। इससे अधिक मरीज आने पर मरीजों को अगले दिन बुलाया जाता है। अस्पताल में गर्भवती महिलाओं और इमरजेंसी केस आने पर वरीयता दी जाती है। - डॉ एसके चौधरी, सीएमएस
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पुष्पा- फोटो : BAGHPAT
बागपत जिला अस्पताल स्थित अल्ट्रासाउंड कक्ष के बाहर लगी मरीजों की भीड़- फोटो : BAGHPAT