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Baghpat News: खेती के साथ डेयरी और मछली पालन से दोगुना होगी आय

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खेकड़ा। केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री पुरुषोत्तम रूपाला ने कहा कि किसानों को खेती के साथ डेयरी उद्योग और मछली पालन पर ध्यान देना होगा। इससे किसानों की आय दोगुनी हो जाएगी। इसके लिए काफी योजनाएं सरकार ने चलाई हुई हैं, जिनका लाभ किसान ले सकते हैं। वह शनिवार को हसनपुर मंसूरी गांव में डेयरी फार्म एवं प्रशिक्षण केंद्र का उद्घाटन करने पहुंचे थे।
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केंद्रीय मंत्री पुरुषोत्तम रूपाला ने कहा कि बागपत की भूमि गंगा-यमुना के बीच की कृषि प्रधान भूमि है। इस डेयरी और प्रशिक्षण केंद्र का लाभ पूरे जिले के पशुपालकों को मिलेगा। इसमें पशुओं की देखरेख करने के बारे में अच्छे से समझाया जाएगा। पशुओं के राशन सामग्री का आहार, उनको दुहना, चारागाह प्रबंधन, बीमार पशुओं की देखभाल, गोबर से गैस, ईंधन, लकड़ी, खाद, सरकारी अनुदान से एक समान चारा, उपचार, देखभाल, मुश्किल जन्म में सहायता, प्रजनन आदि का किसानों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके अलावा कृत्रिम गर्भाधान के पोषण आदि के बारे में भी बताया जाएगा। केंद्रीय मंत्री ने डेयरी किसान नामक किताब का विमोचन भी किया।
-पशुपालकों को निशुल्क मिलेगा प्रशिक्षण
सांसद डा. सत्यपाल सिंह ने कहा कि बागपत में इस प्रकार की डेयरी और प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना पहली बार हुई है। यहां पर सभी पशुपालकों को पशुओं के संबंध में निशुल्क प्रशिक्षण दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसानों के लिए सरकार ने काफी योजनाएं चलाई हुई हैं। उनका लाभ किसानों को लेना चाहिए। इस दौरान हरियाणा की महानिदेशक आलोक राय, कर्नाटक से आशीष पाटिल, कृष्णपाल सिंह चेयरमैन, जसवंत सिंह, प्रवीण मलिक, अजय यादव, प्रवीण यादव, सुधीर यादव, धीरज कुमार, डा सुरेंद्र धामा, अभिषेक राव आदि मौजूद रहे।
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-दूध की गुणवत्ता ठीक नहीं होने पर खोली डेयरी
हसनपुर मंसूरी में डेयरी व प्रशिक्षण संस्थान शुरू करने वाले अजय यादव ने बताया कि वहां पहले दूध के उत्पादों की प्रोसेसिंग यूनिट थी। इसमें पनीर, घी, दही, आइसक्रीम आदि उत्पाद बनाए जाते थे। इसके लिए लोगों से दूध खरीदना पड़ता था, लेकिन दूध की गुणवत्ता कई बार खराब रहती थी। इसलिए ही डेयरी शुरू की गई, जिसमें 200 पशु लाने का लक्ष्य है और अभी तक 40 पशु आ चुके हैं। केंद्र सरकार की योजना के तहत इसे शुरू किया गया है, जिसमें अभी तक डेढ़ से दो करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। इसको साढ़े तीन एकड़ में शुरू किया गया है। यहां के उत्पादों को अन्य राज्यों में स्टोर खोलकर वहां बेचा जाएगा। वहां मछली पालन का प्रशिक्षण देने के लिए अंदर ही तालाब भी बनाया गया है।
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