बागपत। गांवों में पंचायत की जमीन में करोड़ों का खेल चल रहा है। गांवों में करीब दस हजार बीघा से ज्यादा जमीन अपने स्तर पर मिलीभगत करके ठेके पर बुवाई के लिए दे दी गई। जिसका सरकार के पास एक भी रुपया नहीं पहुंच रहा। जमीन पर फसल की बुवाई करने वालों ने राजस्व विभाग की टीम के सामने पूरे मामले का खुलासा किया।
जिले में 244 ग्राम पंचायत हैं और इनमें कुछ गांवों को छोड़कर अधिकतर में पंचायत की जमीन है। सबसे अधिक यमुना किनारे के गांवों में पंचायत के पास जमीन है जो 500 बीघा तक भी है। इस तरह गांवों में करीब दस हजार बीघा से ज्यादा जमीन पंचायत की मौजूद है। इन जमीनों पर कब्जे की शिकायत मिली तो राजस्व विभाग की टीम गांवों में कब्जा हटवाने पहुंची।
वहां जिन लोगों ने फसल की बुवाई की हुई थी, उनसे पूछताछ की गई तो उन्होंने बताया कि यमुना खादर की जमीन फसल बुवाई के लिए एक से दो हजार रुपये बीघा पर ली हुई है। मगर उन जमीनों का मिलने वाला पैसा सरकार के पास नहीं पहुंच रहा है। इस तरह ही पचास से ज्यादा गांवों का मामला सामने आया है। जिससे करोड़ों रुपये का एक साल में सरकार को चूना लगाया जा रहा है।
- यमुना किनारे के इन गांवों में सबसे ज्यादा जमीन
यमुना किनारे के सिसाना, गौरीपुर जवाहरनगर, नैथला, फैजपुर निनाना, लुहारी, कोताना, खेड़ी प्रधान, खेड़ा इस्लामपुर, टांडा, काकौर, बदरखा, जागौस, काठा, पाली, नंगला बहलोलपुर, मवीकलां, सुभानपुर, सांकरौद, निवाड़ा आदि गांवों में सबसे ज्यादा जमीन है। नैथला में करीब 500 बीघा जमीन है तो सांकरौद, सुभानपुर, मवीकलां में भी यमुना खादर में सैंकड़ों बीघा जमीन है। इनके अलावा भी गांवों में जमीन है, मगर किसी भी जगह जमीन का सरकारी ठेका नहीं दिया गया है।
- यमुना खादर में सैंकड़ों बीघा जमीन ग्राम पंचायत की है। प्रधानों को पंचायत की जमीन को पट्टे पर छोड़ने का अधिकार नहीं है। कुछ लोगों ने जमीन पर कब्जा कर रखा है। राजस्व विभाग जमीन को कब्जामुक्त कराने की तरफ ध्यान नहीं दे रहे है। - गीता त्यागी, प्रधान नैथला
- हमारे यहां सैकड़ों बीघा जमीन है, मगर इस जमीन पर कब्जा है। इनमें कुछ लोगों को पट्टे पर जमीन दी गई थी, लेकिन अब उन्होंने जमीन पर ही कब्जा कर लिया है। - दीपक कुमार, प्रधान मवीकलां
- पंचायत की गांव में काफी जमीन है। उसपर गांव के लोग फसल की बुवाई कर लेते हैं। प्रशासन ने भी एक बार बुवाई कराई थी। जमीन के मामले में कोई ध्यान नहीं दे रहा है। - शालू, प्रधान सिसाना
- वर्जन
जिले के किसी भी गांव में पिछले डेढ़ साल से पंचायत की कोई जमीन ठेके पर नहीं दी गई है। उन जमीन की क्या स्थिति है और उनपर कब्जा है तो वह कैसे कब्जामुक्त होगी। यह राजस्व विभाग की जिम्मेदारी है। इसको लेकर बातचीत की जाएगी। - अरुण अत्री, डीपीआरओ