गाजियाबाद जनपद के मोदीनगर थाना क्षेत्र की महिला से हुए गैंगरेप के मामले में डीएनए रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। पुलिस द्वारा आरोपियों के भेजे सैंपल पीड़ित के कपड़ों के नमूने से मिलान नहीं हुआ है। अब सवाल खड़ा हो गया है कि वारदात की हकीकत क्या है? पुलिस सच्चाई को उजागर करने के प्रयास में जुटी हुई है।
पुलिस के मुताबिक महिला ने मोदीनगर थाना में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 20 जनवरी 2013 को वह घर में अकेली थी। इसी दौरान तीन लोग (बबलू, नरेश और महेश) उनके घर पहुंचे। उन्होंने उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। पुलिस केस की विवेचना कर रही थी।
इस पर सवाल उठते देखकर उच्चाधिकारियों ने केस को गाजियाबाद से बागपत ट्रांसफर कर दिया था। तभी से बागपत क्राइम ब्रांच केस की विवेचना कर रही है। पुलिस ने मामले को संदिग्ध माना। केस का सहीं पता लगाने के लिए पुलिस ने डीएनए कराने का निर्णय लिया।
पुलिस ने कोर्ट की अनुमति पर तीनों आरोपियों के सैंपल सितंबर 2015 में लखनऊ लैब में भेजा। साथ ही पीड़ित महिला के कपड़ों के नमूने भी भेजे थे। इसके लिए पुलिस ने पीड़ित के पति को भी सैंपल के लिए बुलाया था। कई नोटिस देने के बाद भी उसने सैंपल नहीं दिया। बाद में उसने नमूना देने से मना कर दिया था। लैब से सैंपल रिपोर्ट पुलिस के पास पहुंच गई है।
केस के विवेचक इंस्पेक्टर राजेंद्र सिंह ने बताया डीएनए की सैंपल रिपोर्ट आ गई है। पीड़ित के कपड़ों के नमूनों और आरोपियों के सैंपल मिलान नहीं हुए है। केस की विवेचना चल रही है। हर बिंदुओं की जांच हो रही है।