बागपत। प्रधानाध्यापक सतपाल शर्मा ने मरते दम तक बदमाशों का मुकाबला किया। इसका खुलासा जेल गए शूटर गौरव ने किया। गौरव ने बताया फायर झोंकने के बाद भी सतपाल ने उसके चचेरे भाई शिशुपाल का कॉलर पकड़ लिया था। जैसे ही उसने रोहित को तमंचे में गोली डालते देखा, तभी वे दीपक-दीपक चिल्लाते भागे थे।
सिंघावली अहीर गांव के हेड मास्टर सतपाल शर्मा अपने विपक्षी राजकरण शर्मा का डटकर मुकाबला कर रहे थे। बेटे सतीश शर्मा की हत्या के बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। पुलिस का साथ न मिलने के बावजूद वे मजबूती से केस की पैरवी करते रहे थे। बीच-बीच में विपक्षी उन पर अटैक करते रहे, लेकिन सतपाल शर्मा मजबूती से डटे रहे। इतना ही नहीं मरते दम तक उन्होंने बदमाशों का मुकाबला किया। इसका खुलासा जेल जाते समय गौरव ने किया।
शूटर गौरव ने बताया उसके भाई सोनू उर्फ शिशुपाल और रोहित ने मास्टर सतपाल के पास पहुंचकर उन पर फायर किया। वे गोली लगने से लहूलुहान हो गए थे। इसके बाद भी सतपाल ने खड़े होकर सोनू की कमीज का कॉलर पकड़ लिया। तभी रोहित ने अपने तमंचे में कारतूस डाला। इसे देख सतपाल भागने लगे। पीछा कर उसके साथियों ने उन्हें गोली मार दी। इससे उनकी मौत हो गई।
q अटैक करने से पहले स्कूल में जाकर की थी सतपाल की पहचान ः बागपत। पकड़े शूटर गौरव ने बताया मास्टर सतपाल पर अटैक करने से पहले वे स्कूल में पहुंचकर मास्टर को अच्छी तरह से देख आए थे। साथ ही स्कूल की स्थिति को भांप ली थी।
q भाई शिशुपाल की मौत का है दुख ः बागपत। आरोपी गौरव ने बताया उसे अपने भाई सोनू उर्फ शिशुपाल उर्फ अमरीकन की मौत का बेहद दुख है। उसने सोनू को मास्टर की हत्या करने से काफी रोका था।
q गौरव बोला : भाई के इंतजार में मेरी भी जान जाने से बची ः बागपत। आरोपी गौरव ने बताया मास्टर सतपाल को गोली मारने के करीब तीन मिनट तक उसने अपने भाई शिशुपाल और रोहित का बाइक पर गली में इंतजार किया, लेकिन वे नहीं आए। तब तक वहां पर काफी लोग आ चुके थे। लोग चिल्लाते हुए उसकी तरह आने लगे, तब वह बाइक लेकर भागा।
पीछा कर लोगों ने फेंककर उसके डंडे मारे, जो उसके हाथ और कमर पर लगे, लेकिन वह वहां से भागने में कामयाब हो गया अन्यथा उसकी भी जान चली जाती।
q निश्चय के साथ रहता था शिशुपाल
बागपत। आरोपी गौरव ने बताया उसका भाई शिशुपाल ग्राम प्रधान के बेटे निश्चय राणा के साथ रहता था। कुछ दिन पूर्व ही उसका निश्चय से विवाद हो गया था। उसने कहा निश्चय के पिता ब्रजपाल को रामबली ने नहीं ओमप्रकाश ने मारा था।