लुहारी गांव के राशन डीलर की निलंबित दुकान को बहाल करने के नाम पर सप्लाई इंस्पेक्टर के 10 हजार रुपये की रिश्वत मांगने की शिकायत पर शनिवार को मेरठ के भ्रष्टाचार निवारण संगठन की टीम ने तहसील में रंगेहाथ रिश्वत देकर सप्लाई इंस्पेक्टर को दबोच लिया। टीम ने कोतवाली में आरोपी सप्लाई इंस्पेक्टर के खिलाफ 7/13 बंदी पीसी एक्ट की धारा में रिपोर्ट दर्ज कराई।
लुहारी गांव के सुधीर पुत्र संसार सिंह की गांव में राशन डीलर की दुकान है, उनकी दुकान वर्तमान समय में निलंबित चल रही है। गांव की राशन की दुकान को बहाल करने के नाम पर तहसील में तैनात सप्लाई इंस्पेक्टर सुधीर पाल सिंह पुत्र अतर सिंह निवासी मेरठ 10 हजार रुपये की रिश्वत मांग रहा था। काफी कहने के बाद भी वह नहीं माना तो सुधीर ने इसकी शिकायत मेरठ में भ्रष्टाचार निवारण संगठन को की।
शनिवार को टीम एके राणा प्रभारी निरीक्षक के नेतृत्व में डीएम के यहां पहुंची और वहां से दो गवाह लेकर बड़ौत तहसील पहुंची। उस समय सप्लाई इंस्पेक्टर सुधीर पाल तहसील में जीने से चढ़कर अपने कार्यालय जा रहे थे। जीने में ही लुहारी निवासी सुधीर ने उन्हें हाथ में रिश्वत 10 हजार रुपये थमाएं।
तभी टीम के लोगों ने उन्हें दबोच लिया और एक-एक हजार के 10 नोटों पर पाउडर लगा था तो टीम के सदस्यों ने उनके हाथ धुलवाएं और उस पानी को भी कब्जे में ले लिया और उसे कोतवाली ले आए और इस संबंध में गिरफ्तार सप्लाई इंस्पेक्टर सुधीर पाल सिंह के खिलाफ 7/13 बंदी पीसी एक्ट की धारा में मामला दर्ज किया ।
इस टीम में प्रभारी निरीक्षक के अलावा उदयवीर सिंह सिरोही, राजवीर सिंह, रामनिवास, अरविंद सिंह, आनंद स्वरूप शर्मा, शारदा सरोही आदि शामिल रहे। दूसरी तरफ गिरफ्तार सप्लाई इंस्पेक्टर सुधीर पाल सिंह ने कहा उन्हें साजिश के तहत फंसाया गया है। आय से अधिक
संपत्ति की जांच शुरू ः बड़ौत। भ्रष्टाचार निवारण टीम ने बताया गिरफ्तार सप्लाई इंस्पेक्टर सुधीर पाल सिंह की आय से अधिक संपत्ति की जांच भी शुरू होगी। सप्लाई इंस्पेक्टर सुधीर की मेरठ में आलीशान कोठी भी है और सप्लाई इंस्पेक्टर बुलैरो कार में चलते हैं। इनके पकड़े जाने से तहसील में अफरातफरी मच गई।
छोटे-बड़े हर काम के लिए मांगते थे पैसे
बड़ौत। गिरफ्तार सप्लाई इंस्पेक्टर सुधीर पाल सिंह एक साल पहले बड़ौत तहसील में नियुक्त हुए थे। वर्तमान समय में इंस्पेक्टर सुधीर छपरौली ब्लॉक और बड़ौत नगर क्षेत्र का कार्यभार देख रहे थे। राशन डीलर उनसे काफी तंग थे। जरा जरा से काम के लिए पैसा मांगता था। आम लोग भी उनसे परेशान थे। जब उनकी पकड़े जाने की सूचना राशन डीलरों को मिली तो वे काफी खुश नजर आए।