ग्रेटर नोएडा में पुलिस मुठभेड़ में पकड़े गए 50 हजार के इनामी सचिन नंदा ने पुलिस के सामने एक और खुलासा किया है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक सचिन ने बताया कि वह बली में रहकर आराम से अग्रवाल मंडी टटीरी में घूमता रहता था।
दुकानों पर खाना खाकर और खरीदारी करके चला जाता था। कई बार पुलिस से भी उसका आमना-सामना हुआ, लेकिन पुलिस वाले उसे पहचान ही नहीं सके।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक सचिन ने बताया कि वह काफी समय अपने गांव बली में व्यतीत करता था। चार-पांच नलकूपों पर उसने रजाई व अन्य गर्म कपड़े रख रखे हैं। कभी किसी ट्यूबवेल पर तो कभी किसी पर रात व्यतीत करता था। वहां से कई बार अग्रवाल मंडी टटीरी में टार्च लेकर खाना खाने भी गया।
कई बार टटीरी व बागपत में सामान की खरीदारी भी की। इस दौरान पुलिस वाले भी उसे टकराए, लेकिन किसी ने उसे टोका तक भी नहीं। रात के समय गांव में जाकर अपने परिजनों और साथियों से मुलाकात करता था। वह अपने साथ टार्च रखता था।
रास्ते में सामने से आने वाले लोगों की आंखों पर टार्च मार देता था, ताकि कोई उसे पहचान न पाए। वह किसी भी स्थान पर लगातार नहीं रहा था। वह स्थान बदल-बदल कर रहता था। नोएडा क्राइम ब्रांच प्रभारी अनिल कपरवान का कहना है कि सचिन नंदा ने इस तरह की जानकारी दी है।
इंस्पेक्टर अनिल कपरवान का कहना है कि सचिन नंदा ने बताया कि पुलिस अभिरक्षा से भागने के बाद वह अपने साथी मोबीन के साथ उसके गांव इदरीशपुर पहुंचा था। वहां पर खेतों में छुपा था। वहां से सीधे अशरफाबाद थल में एक मुर्गा फार्म में कई दिन रहा।
सचिन ने चार जिलों में काटी फरारी
बागपत। सचिन ने पुलिस को बताया कि वह नोएडा में पुलिस अभिरक्षा से भागने के बाद बागपत, मेरठ, गाजियाबाद और गौतमबुद्धनगर में फरारी काटी। सबसे ज्यादा बागपत और नोएडा में रहा था।
सफेदपोशों के संपर्क में था
बागपत। पुलिस सूत्रों के मुताबिक सचिन नंदा ने पूछताछ के दौरान कई सफेदपोशों के नाम बताए, जिसके वह संपर्क में था। इसी तरह वह कई पुलिस वालों के संपर्क में भी था। हालांकि इंस्पेक्टर ने इस तरह की जानकारी होने से इंकार किया है।