बागपत। हादसे में दो युवकों की मौत के बाद आक्रोशित भीड़ ने शहर के राष्ट्र वंदना चौक पर जैसे ही ईंटों की बौछार की। पुलिस वाले अपनी जान बचाने के लिए दुकानों में दुबक गए। पुलिस अफसरों ने वहां पर पहुंचकर मोर्चा संभाला। उनको खुद आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े।
शनिवार की रात में करीब डेढ़ घंटे बवालियों ने दिल्ली-सहारनपुर हाईवे पर स्थित शहर का राष्ट्र वंदना चौक पर उत्पात मचाया। इस दौरान महिला और बच्चों के साथ खूब मारपीट की। मारपीट करने वालों में खाकी का जरा भी डर नहीं था। बवालियों ने तो पुलिस को भी नहीं बख्शा। पुलिस वाले लोगों को समझाने में लगे रहे।
इस दौरान असामाजिक तत्वों ने पुलिस पर ही पथराव शुरू कर दिया। इससे वहां अफरा-तफरी मच गई। पुलिस वाले खुद अपनी जान बचाने को दुकानों में घुस गए। कई पुलिस कर्मियों ने तो वाहनों की आड़ ली। पता चलते ही पुलिस अफसर घटना स्थल पर पहुंची। आक्रोशित भीड़ अफसरों के समझाने पर भी शांत नहीं हुई, बल्कि उन्होंने फायरिंग शुरू कर दी। माहौल बिगड़ता देखकर अफसरों ने हथियार संभाले। एक अफसर ने तो खुद आंसू गैस के गोले छोड़े।
पुलिस की लेट लतीफी से बिगड़ा माहौल
बागपत। लोगों की माने तो जिस स्थान पर हादसा हुआ, वहां पर पुलिस काफी देरी से पहुुंची। एंबुलेंस फरमान को सीएचसी लेकर पहुंची। चिकित्सकों के मृत घोषित करने के काफी देर तक शव सीएचसी में रहा। वहां पर एक पुलिसकर्मी भी नहीं पहुंचा। इससे वहां भीड़ इकट्ठी हो गई और शव को ऑटो में लेकर राष्ट्र वंदना चौक पर पहुंच गई और बवाल कर दिया। यदि पुलिस समय से शव को कब्जे में ले लेती तो शायद बवाल न होता।
बवालियों के खिलाफ मुकदमे दर्ज तक होती है कार्रवाई
बागपत। जनपद में रोड पर जाम बवाल करने की पहली घटना नहीं है। इससे पहले अनेकों बार इस तरह की घटनाएं हो चुकी हैं। पुलिस बवालियों के खिलाफ केस भी दर्ज करती है, लेकिन आगे की कार्रवाई दिखाई नहीं देती है। डेढ़ साल पूर्व डौला गांव में रोड पर खूब बवाल हुआ था। बवालियों ने तत्कालीन सीओ पर पथराव कर दिया था। इससे वे घायल हो गए थे। कई पुलिसकर्मी चोटिल भी हुए थे। सिंघावली अहीर थाने में बवालियों के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज हुआ, लेकिन बाद में केस ठंडे बस्ते में चला गया था। अब देखना है कि राष्ट्र वंदना चौक के बवाल के केस में पुलिस बवालियों के खिलाफ आगे क्या कार्रवाई करती है।