जिंदगी में खुशियों के रंग भरने के लिए नौकरी की चाह में सऊदी अरब पहुंचे बड़ौत शहर के दोनों युवकों ने पीड़ा बयान की। उन्होंने कहा कि यहां भारतीयों पर जुल्म ढहाए जा रहे हैं। अकेले वेस्ट यूपी के सैकड़ों लोग अरब में फंसे हैं। पासपोर्ट छीन लिए हैं और बंधक बनाकर मजदूरी के कार्य में लगा दिया जाता है।
बुधवार को सऊदी अरब स्थित भारतीय दूतावास से बड़ौत के किदवईनगर निवासी सादिक ने फोन के जरिये बातचीत में अपना दर्द बयां किया। सादिक ने कहा उनके जैसे सैकड़ों लोग यहां एजेंट के माध्यम से नौकरी की चाह में आए थे। सबको बेहतर काम और बेहतर सैलरी का लालच दिया था, लेकिन ठिकाने पर पहुंचते ही पासपोर्ट छीन लिए जाते हैं।
भारतीयों पर जुल्म ढहाए जा रहे हैं। शिक्षित लोगों से भी मजदूरी कराई जाती है। खाना तक नहीं दिया जाता, घर में बातें नहीं करने दी जाती। कई कई साल से यहां लोग फंसे हैं। सूचना देने के बाद भारतीय दूतावास के अधिकारी अपने देश के लोगों को वापस लाने के लिए पुरजोर कोशिश में जुटे हैं।
कैसे फंसे सादिक और नफीस
मुंबई के एजेंट के माध्यम से बड़ौत के दोनों युवक पिछले माह 27 मार्च को सऊदी अरब गए थे। दो हजार रियाल प्रति माह की सैलरी तय हुई थी, लेकिन उनका पासपोर्ट छीन लिया गया। उत्पीड़न किया गया, इससे परेशान होकर वह किसी तरह भारतीय दूतावास तक पहुंचे।
क्या कहते हैं पीड़ित
सादिक की पत्नी सलमा कहती हैं कि किसी तरह उनके पति भारतीय दूतावास तक पहुंचे हैं। केस नंबर मिल गया है, एक सप्ताह में वापसी का भरोसा दिलाया है। सूचना मिलते ही सादिक के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार के ही गुलजार ने कहा केंद्र सरकार को सऊदी अरब सरकार से बात कर वहां फंसे भारतीयों को मुक्त कराना चाहिए।
कहां के युवक फंसे हैं अरब में
बागपत के अलावा मुजफ्फरनगर, शामली, सहारनपुर, बिजनौर, दिल्ली, हरियाणा के जिला सोनीपत, पानीपत, अंबाला आदि जिलों के सैकड़ों युवक भी नौकरी के झांसे में आकर वर्षों से यहां पर बंधक हैं। उन्हें भी अच्छा वेतन देने की बात कहकर यहां पर लाया गया है। पीड़ितों का दावा है कि अगर पूरे देश की बात करें तो लाखों भारतीय सऊदी अरब में फंसे हैं।