हरियाणा, एनसीआर क्षेत्र और दिल्ली से शुरू हुआ चुड़ैल और चोटी कटने का हल्ला सहारनपुर, बिजनौर, मुजफ्फरनगर, बागपत और बड़ौत तक पहुंच गया है।
दहशत का हाल यह है कि लोग जागकर पहरा दे रहे हैं, टोना टोटका करने वाले तांत्रिकों की शरण में जा रहे हैं, वह मौके का फायदा उठाकर लोगों को ठग रहे हैं। पुलिस की टीमें सच्चाई जानने के लिए गांवों में एक-एक व्यक्ति से बात कर रहीं हैं।
फिलहाल पुलिस इन्हें शरारती तत्वों की शरारत बता रही है, लेकिन अभी तक कोई पकड़ा नहीं जा सका। मनोविशेषज्ञ इसे दहशत के चलते दिमाग में होने वाला केमिकल लोचा मान रहे हैं। इस बात को बल मनोविशेषज्ञों द्वारा बताए जा रहे कारणों से भी मिल रहा है।
सहारनपुर के मनोरोग विशेषज्ञ अमरजीत पोपली का कहना है कि यह मास हिस्टीरिया की वजह दिमागी केमिकल लोचा है, इस प्रकार की बातों से व्यक्ति खुद को जोड़ देता है और भावों में बहकर व्यक्ति उसी प्रकार की हरकतें करने लगता है।
दिमाग में मास हिस्टीरिया के तहत डोपामाइन और सिरोटोनिन जैसे केमिकल हलचल पैदा करते हैं, जो मौसम के बदलने, विटामिनों की कमी अथवा दहशत के चलते न्यूरो ट्रांसमीटर से संतुलन को बढ़ा अथवा कम कर देते हैं। जिससे व्यक्ति अलग तरह की हरकतें करने लगता है। कुछ लोग इसका फायदा उठाकर खुद को सुर्खियों में लाने के लिए इस प्रकार का कार्य कर देते हैं।
ये भी हो सकती है वजह
1- अधिकांश घटनाएं बाहरी इलाकों में रहने वाले मकानों में हुई है। बरसात के मौसम में न लोग खुले में सो पाते है और न मकानों के कमरों को बंद कर सो पाते हैं। ऐसे में कुछ लोग इस तरह का हल्ला मचा देते है, जिससे दहशत में आए लोग जागकर पहरा देने लगते है।
2 - कुछ शरारती तत्व भी ऐसे मौकों का फायदा उठाते हैं। मनोविज्ञानी बताते हैं कि उन्हें ऐसा करने और बाद में लोगों को परेशान होता देखने में एक आनंद की अनुभूति होती है। हो सकता है कि वह सो रही महिला की चोटी काटकर भाग जाते हों।
3 - कुछ किशोरी और युवतियां अपने बाल कटवाना चाहती है, लेकिन परिवारिक और सामाजिक बंदिशों के चलते वह ऐसा नहीं करा पाती। वह खुद भी अपनी चोटी काट लेती है और ऐसी अफवाहों और तंत्र मंत्र करने के संदेह जताकर मामले को दूसरा मोड़ देती है। छात्राओं के बीच ऐसे मामलों की चर्चा हो रही है।