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कानूनगो को रिश्वत लेते पकड़ा

Thu, 25 Jan 2018 12:39 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, दोघट
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रिश्कावत लेने का अरोपी कानूनगो रणवीर - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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विजिलेंस की टीम ने बामनौली गांव में चकबंदी में चक सही बनाने के लिए किसान से 20 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए कानूनगो को रंगे हाथों पकड़ लिया। टीम  उसे दोघट थाने ले गई। थाने में कानूनगो के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने की तैयारी चल रही है। थाना परिसर में देर रात किसानों की भीड़ लगी रही। 
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बामनौली गांव के किसान रणवीर पुत्र अतर सिंह का चक चकबंदी में गलत तरीके से काट दिया गया था। इसे सही कराने के लिए किसान चकबंदी विभाग के अधिकारियों के चक्कर काट रहा था। कुछ दिन पहले चकबंदी कानूनगो रणवीर से पीड़ित किसान मिला तो कानूनगो ने उससे कहा कि चक सही जगह बन जाएगा, इसकी एवज में 20 हजार रुपये देने होंगे।

किसान ने हामी भर दी और प्रकरण की जानकारी विजिलेंस की मेरठ टीम को दे दी। विजिलेंस के अधिकारियों ने कानूनगो को रंगे हाथों पकड़ने के लिए तैयारी की। किसान से बुधवार को शाम के समय रुपये देने के लिए कानूनगो को गांव में अपने घर बुलाने को कहा।
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इस पर किसान ने कानूनगो रणवीर निवासी नेहरूपुर खुर्जा जिला बुलंदशहर को बुधवार को देर शाम रुपये देने के लिए अपने घर बुलाया। बुधवार की शाम विजिलेंस टीम के प्रभारी केपी सिंह, इंस्पेक्टर जेके तोमर, एचसीपी वसीम अख्तर, आनंद स्वरूप शर्मा, राजवीर सिंह, शारदा सिरोही बामनौली में किसान के घर पहुंचे गए। 

देर शाम कानूनगो भी किसान के घर में पहुंचा तो पीड़ित किसान ने विजिलेंस टीम द्वारा दिए  20 हजार रुपये को कानूनगो को दे दिया। इसी दौरान विजिलेंस टीम ने कानूनगो को रंगे हाथों पकड़ लिया।

विजिलेंस टीम को देखकर कानूनगो मौके से भागने लगा, लेकिन उसे धरदबोचा और दोघट थाने ले गई। किसान ने थाने में कानूनगो के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई । देर रात तक बामनौली गांव के सैकड़ों किसान थाने में मौजूद रहे और कानूनगो के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते रहे। 

रिश्वत देते-देते कर्जदार हो गए किसान 
दोघट। बामनौली में तीन दशक से चल रही चकबंदी ने सैकड़ों किसानों को बर्बाद करके रख दिया है। पांच दिसंबर 2017 को गांव में चकबंदी से आहत होकर किसान कृष्णपाल ने आत्महत्या की। उसकी पत्नी ने बताया चकबंदी अधिकारियों से उनसे लाखों रुपये ले लिए और इसके बाद भी उनका चक सही जगह नहीं काटा था।

ऐसे ही गांव में कई किसान हैं, इनसे चकबंदी अधिकारियों, कानूनगो ने चक सही जगह काटने के लिए रुपये हुए हैं, लेकिन उन किसानों के चक सही नहीं बनाए हैं। अब ये किसान चकबंदी अधिकारियों को रिश्वत देते-देते कर्ज बंद हो गए हैं। 

हेरफेर में इन पर चला कार्रवाई का चाबुक
बागपत। जिले के बामनौली, बरनावा, निरपुड़ा और रंछाड़ मेें वर्ष 1981 से चकबंदी की प्रक्रिया चल रही है। बामनौली गांव की चकबंदी प्रक्रिया से आहत किसान कृष्णपाल ने पांच दिसंबर 2017 को जहरीले पदार्थ का सेवन कर आत्महत्या की।

बामनौली गांव के पूर्व प्रधान महीपाल सिंह समेत अन्य किसानों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अलावा मेरठ कमिश्नर डॉ. प्रभात कुमार से गड़बड़ी की शिकायत की । चकबंदी निदेशालय, मंडलायुक्त कार्यालय और जिले के अधिकारियों की संयुक्त टीम गठित कराकर जांच कराई ।

वर्ष 2001 से मार्च 2017 तक कराई चकबंदी की जांच हुई तो अनियमितता, रिकॉर्ड में गड़बड़ी कर सरकारी जमीन की हेरफेर करने के साक्ष्य मिले। इस पर बागपत में तैनात रहे तत्कालीन बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी सोहनलाल, तत्कालीन बंदोबस्त अधिकारी अशोक कुमार के खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन को पिछले दिनों पत्र लिखा है।

तत्कालीन चकबंदी अधिकारी और वर्तमान में फिरोजाबाद में तैनात लाल बहादुर के खिलाफ राजस्व विभाग को पत्र लिखा है। इसके अलावा तत्कालीन चकबंदीकर्ता रामरतन प्रजापति, तत्कालीन चकबंदी अधिकारी बागपत मंजू लता और बागपत के चकबंदी अधिकारी राजेश कुमार के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के निर्देश प्रमुख सचिव ने दिए हैं। 
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बगैर जानकारी गांव में गया था चकबंदी कर्ता
बागपत। एसओसी चकबंदी अजय उपाध्याय का कहना है कि चकबंदी कर्ता उन्हें जानकारी दिए बगैर गांव गया था। उन्हें अभी रिश्वत लेने के मामले की जानकारी नहीं है।
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