यमुना के खादर में खनन के रास्ते को लेकर हुए बवाल की जड़ करीब 14 हेक्टेयर यानि 168 बीघा जमीन है। गौरीपुर ग्राम सभा की इसी जमीन पर खनन का पट्टा छोड़ दिया गया है, लेकिन जमीन पर निवाड़ा गांव के 11 किसान काबिज हैं।
बवाल के बाद दर्ज मुकदमे में भी इस जमीन को प्रधान से उगाही पर लेने की बात कही। प्रशासन की जांच में किसानों ने यह स्वीकार किया, लेकिन प्रधान और ग्रामीण इसकी रसीद नहीं दिखा पाए।
गढ़-सोनीपत हाईवे के एक तरफ निवाड़ा गांव है और दूसरी तरफ गौरीपुर। निवाड़ा पुलिस चेक पोस्ट के पास ई-टेंडरिंग से गौरीपुर के रकबा में खनन का ठेका छोड़ा। इस क्षेत्र की करीब तीन सौ बीघा जमीन निवाड़ा के किसान बुवाई कर रहे हैं।
इसमें 168 बीघा वह जमीन भी शामिल है, जो गौरीपुर ग्राम सभा की है। किसानों का प्रशासन से कहना था कि यह जमीन उन्होंने ग्राम प्रधान से उगाही पर ली है। इसकी रकम वह प्रधान को दे चुके हैं, इस वजह से उन्हें गेहूं की फसल काटने तक अनुमति मिलनी चाहिए।
प्रशासन की जांच में प्रधान ने यह स्वीकार किया है कि जमीन निवाड़ा के लोगों को दी, लेकिन कागजी कार्रवाई नहीं की। खनन ठेकेदार वर्क आर्डर लेकर पहुंचा तो पुलिस-प्रशासन की टीम पहुंच गई। सवाल यह है कि अगर ग्राम समाज की भूमि प्रधान ने उगाही पर दी तो प्रशासन को अवगत कराकर खनन के पट्टे के लिए अनुमति क्यों नहीं ली।
इन किसानों की खड़ी है फसल
बागपत। निवाड़ा गांव के किसान गफ्फार, इकरामू, फरमान, सत्तार, दिलशाद, कुरबान, जाहिद, सौराज, यासीन, बारी और जमील की गेहूं की फसल खड़ी हुई है।