बागपत के दोघट थाना क्षेत्र के एक गांव में शादी रचाकर पहुंचे प्रेमी युगल को लेकर पंचायत की गई। पंचायत में प्रेमिका को उसके मायके वालों के हवाले करने का फरमान सुनाया गया, तो उसने गुस्से में भरी पंचायत में अपने गले में चुनरी का फंदा लगाकर आत्महत्या का प्रयास किया। मगर, लोगों ने उसे किसी तरह बचा लिया। इस पर पंचायत ने अपना फैसला बदलते हुए प्रेमी युगल को गांव में न रहने का फरमान सुना दिया। पंचायत के फरमान के बाद युवक और युवती हरिद्वार के लिए चले गए।
दोघट कस्बे से 15 दिन पूर्व एक शादीशुदा महिला गांव के ही प्रेमी के साथ फरार हो गई थी। इस पर महिला के पति ने दोघट थाने पर पत्नी को बहला फुसलाकर भगा ले जाने की तहरीर दी थी। पुलिस ने एनसीआर दर्ज की थी। कोई कार्रवाई होती न देख महिला के पति ने बागपत न्यायालय की शरण ली थी।
अभी तक न्यायालय से कोई आदेश जारी नहीं किए गए थे कि शुक्रवार को दोनों आर्य समाज मंदिर में शादी कर गांव प्रधान के घर पहुंच गए। ग्राम प्रधान ने दोघट कस्बे के चेयरमैन पिंटू चौधरी को फोन पर सूचना दी। चेयरमैन, महिला के ससुराल और मायके वालों को लेकर गांव पहुंचे और पंचायत बुलाई गई।
दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद पंचों ने फरमान सुनाया कि महिला को न तो उसका पति ही रखेगा और न ही प्रेमी। इसके पिता के साथ भेजा जाएगा। इस फैसले को सुनकर महिला गुस्से से भर उठी और भरी पंचायत में ही अपनी चुनरी से गले में फंदा लगाकर आत्महत्या का प्रयास किया।
पंचायत में मौजूद लोगों ने उसे किसी तरह बचाया।
महिला की हठ देख पंचों को भी फिर से फैसले पर विचार करने पर मजबूर होना पड़ा। पंचायत ने बाद में फैसला सुनाया कि महिला अगर प्रेमी के साथ ही रहना चाहती है, तो वह उसके साथ ही रह सकती है, लेकिन इन्हें गांव में नहीं रहने दिया जाएगा। प्रेमी युगल ने इस फैसले को स्वीकार कर लिया और हरिद्वार के लिए रवाना हो गए।
पंचायत ने महिला के एक साल के बेटे को भी उसके नाना को सौंप दिया। इस संबंध में दोघट थानाध्यक्ष लोकेश शर्मा ने बताया कि गांव में पंचायत की उन्हें जानकारी नहीं है। महिला की गुमशुदगी के मामले में थाने पर एनसीआर दर्ज है। उसके पति ने न्यायालय में प्रार्थना पत्र दाखिल कर रखा। न्यायालय का आदेश आने के बाद ही इस मामले में कार्रवाई की जाएगी।