शेखपुरा गांव से करीब 17 माह से लापता बच्ची के शव की तलाश में रविवार को पुलिस और क्राइम ब्रांच ने बरनावा गांव की बणी (वन क्षेत्र) को खंगाल डाला। मामले के मुख्य आरोपी ने जहां-जहां शव दाबने की बात कही, पुलिस ने वहां-वहां जेसीबी से खुदाई कराई, लेकिन कुछ हाथ नहीं लगा।
मोना (7 वर्ष) शेखपुरा गांव निवासी कृष्णपाल की पुत्री है, जो कक्षा दो में पढ़ती थी। चार अगस्त 2014 को वह घर के बाहर खेलते समय लापता हो गई थी। नौ अगस्त को उसके पिता के मोबाइल पर एसएमएस आया, जिसमें उससे 15 लाख रुपये की मांग की गई।
पुलिस ने इस मामले में तब रविंद्र उर्फ जितेंद्र पुत्र शीशपाल निवासी शेखपुरा को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था, जबकि उसका भाई मुख्य आरोपी पवन फरार हो गया था। वह राजस्थान में साधु बनकर रहने लगा था। करीब चार दिन पहले शेखपुरा गांव के लोगों ने उसे गल्हैता गांव के जंगल में एक कुटी में पहचान लिया।
सूचना पर पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया था। पवन ने इस घटना में गांव के ही कुलदीप पुत्र कैलाश का नाम भी लिया था। पुलिस ने उसे भी गिरफ्तार कर लिया है। दोनों आरोपियों ने बताया कि उन्होंने रुपये नहीं मिलने पर बच्ची की गला दबाकर हत्या करने के बाद शव को बरनावा गांव की बणी में फेंक दिया था।
इस मामले की जांच कर रहे क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर रामशरण रविवार को बिनौली पुलिस के साथ जेसीबी लेकर आरोपी के बताए स्थान पर पहुंचे। उन्होंने आरोपी की निशानदेही पर पूरे दिन बरनावा बणी में जगह-जगह खुदाई कराकर मोना की तलाश की, लेकिन उसका कुछ पता नहीं चला।
शनिवार को भी पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर कई जगह फावड़ों से खुदाई कराई थी। इंस्पेक्टर रामशरण ने बताया कि अभी मामले की और गहनता से जांच के साथ ही तलाशी कराई जाएगी। उधर, बेटी के नहीं मिलने से उसकी मां सुनीता गमजदा है। बच्ची की याद में उसके आंसू नहीं थम रहे हैं।