चकबंदी प्रक्रिया को लेकर किसान आहत है। बामनौली के किसान की आत्महत्या का मामला सीएम योगी आदित्यनाथ तक पहुंच चुका है। अब बरनावा के किसान आदेश शर्मा ने कमिश्नर को पत्र भेजकर आत्महत्या की अनुमति मांगी है। किसान का कहना है कि लंबे समय से चकबंदी चल रही है, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ है।
जिले के निरपुड़ा, बामनौली, रंछाड़ और बरनावा गांव में कई दशक से चकबंदी की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन अब तक पूरी नहीं हुई। समय-समय पर इसे लेकर विवाद उठता रहता है। बरनावा के किसान आदेश शर्मा ने कमिश्नर डॉ. प्रभात कुमार को पत्र भेजकर चकबंदी से आहत बताते हुए आत्महत्या की अनुमति मांगी है। किसान का कहना है कि स्थानीय प्रशासन से उसने न्याय की उम्मीद छोड़ दी है। उसके साथ इंसाफ नहीं हुआ। उसे उसका हक अभी तक नहीं मिला है।
बामनौली गांव में चकबंदी प्रक्रिया 36 साल तक चली। विवादों के बवंडर उठते रहे। पिछले वर्ष चकबंदी की टीम पहुंचे तो किसान धरने पर बैठ गए थे। नौ दिन तक धरना चला। इसके बाद किसानों को किसी तरह मनाकर चकबंदी कराई, लेकिन इसके बाद भी इस पर सवाल उठते रहे हैं।
बामनौली गांव में 1981 से चकबंदी प्रक्रिया शुरू की । आरोप लगाया कि किसानों के गलत तरीके से चक बनाए। इसको लेकर किसान कोर्ट चले गए। इसके बाद फिर 1989 में चक काटे गए, वह भी गलत तरीके से काटे गए थे।
इसके बाद 1991 में चक काटे गए और धारा 20 लगा दी । उस समय न्यायालय के आदेश पर विजिलेंस की टीम ने इसकी जांच की तो खामियां मिलीं। फिर से चक बनाने के लिए कहा गया था।
किसानों का आरोप है कि चकबंदी अधिकारियों ने चकबंदी में व्याप्त खामियों को दूर किए बिना ही फिर से चक काट दिए। इसके खिलाफ फिर से किसान कोर्ट चले गए। किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि वर्ष 2016 में चकबंदी अधिकारियों ने फर्जी दस्तावेज न्यायालय में पेश कर चकबंदी कराने के आदेश जारी करा लिए और कोर्ट के आदेश पर चकबंदी कराई गई।
हवाई चक काटने का गूंजता रहा मुद्दा
दोघट। बामनौली गांव की चकबंदी प्रक्रिया पिछले वर्ष अगस्त में पूरी की गई थी। इसके बावजूद कई बार विवाद उठे। आरोप लगाया गया कि हवाई चक काटे गए हैं। इसके अलावा कई किसानों को अब तक कब्जे नहीं मिले। यही नहीं ऐसे भी मामले सामने आए कि किसानों ने फसलें काटकर जमीन अब तक खाली नहीं की। कई बार गांव में टकराव के हालात भी बनें है।
बामनौली में किसान को परिवार सहित धमकी
दोघट। बामनौली गांव में अपनी जमीन पाने की लड़ाई लड़ रहे किसान के घर पर परिवार समेत जान से मारने की धमकी भरा पत्र डालने से परिवार दहशत फैल गई है। पीड़ित ने पुलिस को तहरीर देकर न्याय की गुहार लगाई।
बामनौली निवासी महेश पाल के मकान में सोमवार की रात में धमकी भरा पत्र फेंका। इसमें लिखा है कि तुम जो अपनी जमीन पाने के लिए चकबंदी विभाग के चक्कर काट रहे, हो चुप बैठ जाओ और अपना मामला वापस ले लो, वरना तुम्हें और परिवार को जान से मार दिया जाएगा।
पीड़ित ने दोघट थाने में अज्ञात के खिलाफ तहरीर दी है। पीड़ित महेश पाल के अनुसार उसके पिता स्वर्गीय रामपाल को सन 1976 में नसबंदी कराने पर पांच बीघा जमीन मिली । इस पर कुछ दिन बाद ही कुछ लोगों ने जबरन कब्जा कर लिया ।
इसके बाद तत्कालीन ग्राम प्रधान निरंजन सिंह ने उनकी माली हालात देखकर दोबारा तीन बीघा जमीन का पट्टा दे दिया। कुछ समय बाद इस पर भी कब्जा कर लिया । उन्होंने कहा उसकी जमीन मात्र डेढ़ बीघा ही दी। जबकि अपने पिता की मौत के बाद से वह कानूनी लड़ाई लड़ रहा है। अपनी जमीन पाने के लिए आत्महत्या तक का प्रयास कर चुका है।
जमीन न मिल पाने से नाराज किसान परिवार समेत इच्छा मृत्यु की मांग भी कर चुका है, लेकिन समाधान नहीं हुआ। उन्होंने बताया लखनऊ से सोमवार को चकबंदी अधिकारियों की टीम बामनौली जांच करने पहुंची, इसमे महेश पाल ने भी समस्या रखी ।
उन्होंने बताया सुबह सवेरे उसकी पत्नी को घर के आंगन में धमकी भरा पत्र पड़ा मिला। महेश पाल ने पुलिस से अपने परिवार की सुरक्षा की मांग की । धमकी भरा पत्र मिलने से परिवार में दहशत फैल गई है। वहीं एसओ दोघट चितवन कुमार ने बताया मामले की जांच कर कार्रवाई कराई जाएगी।
बामनौली के किसान लखनऊ में सीएम से मिले
दोघट। बामनौली गांव के किसानों के प्रतिनिधिमंडल ने लखनऊ में मुख्यमंत्री से मुलाकात की। उन्हें ज्ञापन देकर चकबंदी अधिकारियों के मनमाने ढंग से कार्य करने और गरीब लोगों को प्रताड़ित कर धन उगाही करने की शिकायत की।
मुख्यमंत्री ने किसानों के प्रतिनिधि मंडल को जांच कराने की आश्वासन दिया। किसानों ने सीएम को दिए प्रार्थना पत्र में बताया गांव बामनौली में गलत तरीके से चकबंदी की । उन्होंने कहाचकबंदी अधिकारी मनमाने ढंग से धन उगाही कर रहे हैं।
पूर्व अधिकारियों के आदेश पर, जिन लोगों के चक बन गए थे, उन्हें इधर से उधर करके पूर्व अधिकारियों के आदेश पलटे जा रहे हैं। उक्त चकबंदी अधिकारी 50 हजार से लेकर एक लाख रुपये तक की रकम किसानों को चक पलटने की धमकी देकर ले रहे हैं।
उन्होंने कई किसानों से एक लाख रुपये की मांग की । अधिकारी की मानसिक प्रताड़ना से आहत होकर पांच दिसंबर को किसान कृष्णपाल ने आत्महत्या कर ली। जिसकी पत्नी न्याय के लिए दर-दर भटक रही है।
उन्होंने चकबंदी अधिकारी के खिलाफ जांच कराकर कार्रवाई की मांग की । इस पर मुख्यमंत्री ने किसान प्रतिनिधि मंडल के सदस्यों को जांच कराकर कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है। इसमें राम रोशन, धर्मपाल, पुष्पेंद्र, सत्यपाल आदि रहे।