बागपत। कानून के साथ खिलवाड़ कर आबकारी निरीक्षक ने निर्दोष युवक को शराब तस्करी में जेल भेज दिया। मामला अदालत की चौखट तक पहुंचा। विवेचना हुई तो बागपत जेल में बंद आरोपी निर्दोष साबित हुआ। सीजेएम मुकेश कुमार प्रमुख सचिव एवं पुलिस अधिकारियों को आबकारी निरीक्षक के कार्रवाई के लिए आदेश दिए हैं।
शामली के लोहरीपुर खंद्रावली गांव का राशिद पंजाब के भटिंडा की एक शराब कंपनी से ट्रक में 1200 पेटी अंग्रेजी शराब लादकर नौ मार्च को आंध्र प्रदेश के लिए चला था। 11 मार्च को जैसे ही वह ट्रक लेकर बागपत के गौरीपुर मोड़ के पास पहुंचा, तभी आबकारी निरीक्षक अमित कुमार के नेतृत्व में टीम ने उसे पकड़ लिया। राशिद पर ट्रक का नंबर बदलकर शराब की तस्करी करने का आरोप लगाते हुए कोतवाली में आबकारी इंस्पेक्टर ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसके बाद राशिद को जेल भेज दिया गया।
जेल भेजे गए राशिद ने अपने अधिवक्ता नरेंद्र कुमार के माध्यम से सीजेएम कोर्ट में प्रार्थना पत्र दाखिल करते हुए खुद को निर्दोष बताया। इस पर सीजेएम मुकेश कुमार सिंह ने मामले में संज्ञान लेते हुए केस के विवेचक हंसराज और आबकारी निरीक्षक से रिपोर्ट मांगी। विवेचक ने राशिद के पास से मिले सभी दस्तावेज सही बताए। रिपोर्ट के आधार पर कोर्ट ने माना कि आबकारी इंस्पेक्टर अमित कुमार ने गलत तरीके से राशिद के खिलाफ केस दर्ज कराया है। कोर्ट ने कोतवाली के एसएचओ को इस मामले में आरोपी आबकारी निरीक्षक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने के आदेश दिए हैं। उधर, कोर्ट के आदेश के बाद बेगुनाह राशिद को आठ दिन बाद जमानत मिल गई। बुधवार को उसकी रिहाई होगी।
निरीक्षक ने क्या की थी गड़बडी़?
आबकारी इंस्पेक्टर ने बरामद ट्रक की फर्जी नंबर प्लेट को आधार बनाते हुए स्वयं फर्द तैयार कर चालान के लिए पुलिस को दिया था, जबकि आबकारी इंस्पेक्टर को नंबर प्लेट चेक करने और उसकी फर्द का कोई अधिकार ही नहीं है। कोर्ट ने नंबर प्लेट की फर्द चेक की तो यह गड़बड़ी सामने आई। इस पर केवल आबकारी इंस्पेक्टर के हस्ताक्षर मिले, जबकि पुलिस के हस्ताक्षर नहीं थे।
थाने में क्यों नहीं रखा गया माल?
जांच में यह भी सवाल उठा है कि इस तरह के मामले में बरामदशुदा माल थाने के मालखाने में रखा जाता है। मालखाने का प्रभारी थाने का थानाध्यक्ष होता है। इस मामले में बरामद माल आबकारी निरीक्षक के गोदाम में रखा गया। बगैर कोर्ट की अनुमति के माल को आबकारी के गोदाम में क्यों रखा गया।
पंजाब के भटिंडा जाकर मामले की जांच की। शराब और ट्रक के सभी कागजात सही पाए गए। इसकी रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत कर दी गई थी।
- एचसीपी हंसराज, विवेचक।
अपना पक्ष कोर्ट में रख चुका हूं, जिस वक्त ट्रक पकड़ा चालक कोई दस्तावेज नहीं दिखा पाया। इसी आधार पर कार्रवाई की गई थी। फैसले की जानकारी नहीं है।
- अमित कुमार, आबकारी निरीक्षक।