बागपत के जिवाना गुलियान गांव में समायोजन रद्द होने की खबर सुनते ही शिक्षामित्र मीनाक्षी बेहोश गई और कुछ समय बाद ही उसकी मौत हो गई। उसकी मौत से परिवार में कोहराम मच गया। उधर, ग्राम प्रधान और शिक्षामित्र संघ के अध्यक्ष ने मीनाक्षी की मौत निर्णय आने से दो दिन पहले होना बताया है।
जिवाना गुलियान निवासी मीनाक्षी (35) पुत्री स्वर्गीय वेदपाल वर्ष 2005 से माज माजरा विद्यालय नंबर एक में शिक्षा मित्र थी। वर्ष 2013-14 में उसने बीटीसी का प्रशिक्षण डायट बड़ौत से किया था। अविवाहित मीनाक्षी तभी से वह सहायक अध्यापक बनने के सपने संजोए हुए थी। मगर, अभी तक उसकी नियुक्ति नहीं हुई थी।
भाई विपिन सोलंकी ने बताया कि रविवार को उसे हाईकोर्ट के फैसले की जानकारी मिली तो वह परेशान हो गई। रविवार देर शाम को अचानक बेहोश होकर गिर गई। उसे गांव के ही एक निजी चिकित्सक के पास ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई। चिकित्सक के मुताबिक उसके दिल पर गहरा धक्का लगा था, इसी कारण उसकी मौत हुई है। इससे उसके परिवार में कोहराम मच गया। मां ओमकली का रो-रोकर बुरा हाल था। मीनाक्षी के परिजनों ने उसका अंतिम संस्कार कर दिया।
नौ सितंबर को हुई मौत
बिनौली। मीनाक्षी की मौत को लेकर परिजनों एवं अन्य लोगों में विरोधाभास है। शिक्षामित्र संघ के अध्यक्ष राजेश पंवार ने बताया कि शिक्षामित्र मीनाक्षी का निधन नौ सितंबर की रात को हो गया था। ग्राम प्रधान ओमपाल का भी यहीं कहना है कि रविवार को नहीं, मीनाक्षी की मौत चार दिन पहले हुई। जबकि मीनाक्षी के परिजन रविवार को ही मौत होने की बात कह रहे हैं।
सरकार को कुछ करना चाहिए
बिनौली। मीनाक्षी के चाचा रिछपाल सोलंकी का कहना था कि हाईकोर्ट पर जो फैसला आया है वह शिक्षा मित्रों के लिए ठीक नहीं है। इससे शिक्षा मित्र परेशान हैं। ऐसे में सरकार को कुछ करना चाहिए। मीनाक्षी के परिवार में अब मां, भाई और भाभी रह गए हैं, पिता की पहले ही मौत हो चुकी है। भाई भी बीमार रहता है।