सांकरौद गांव के बहुचर्चित खाप पंचायत के फरमान का मामला दो साल बाद फिर सुर्खियों में आ गया। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली के एक युवक को पुलिस ने घर से उठाकर पिटाई की। बाद में उसको हवालात में बंद कर दिया। इस मामले में पुलिस वालों समेत सात लोगों को आरोपी माना। इनके खिलाफ खेकड़ा थाने में रिपोर्ट दर्ज हुई।
सांकरौद गांव की युवती वर्ष 2015 में घर से गायब हो गई थी। इस मामले में युवती के परिजनों ने गांव के दलित युवक पर अपहरण करके ले जाने का आरोप लगाकर पुलिस से शिकायत की थी। पुलिस उसकी बरामदगी के प्रयास में लगी हुई थी। इस मामले में पुलिस शाहदरा से एक युवक को लेकर आई थी। बाद में युवक ने मानवाधिकार आयोग में शिकायत की।
रिपोर्ट के मुताबिक युवक को दरोगा अमन सिंह पुलिस वालों और तीन लोगों के साथ मिलकर घर से जबरदस्ती लेकर आया। बाद में उसको हवालात में रखा। खेकड़ा थाना प्रभारी देवेंद्र बिष्ट ने बताया इस मामले में दरोगा अमन सिंह के अलावा युवक मनोज, सुधीर, विकास को नामजद करकर दो-तीन पुलिस वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ है। केस की विवेचना के आधार पर कार्रवाई होगी।
यह है मामला
बागपत। सांकरौद गांव की दलित युवती ने वर्ष 2015 में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर बताया था कि उसके भाई का गांव में रहने वाले दूसरी बिरादरी की युवती से प्रेम प्रसंग चल रहा था। दोनों घर से चले गए थे। मेरठ पुलिस ने दोनों को बरामद किया।
युवती के पिता से मिलीभगत कर पुलिस ने फर्जी तरीके से उसके भाई से डोडा बरामद कर जेल भेजा। इतना ही नहीं युवती की बिरादरी के लोगों ने खाप पंचायत करके उसे और उसकी बहन को निर्वस्त्र कर गांव में घूमाने का फरमान सुनाया था।
युवती ने आरोपी युवक पर दिल्ली पुलिस में नौकरी लगवाने का झांसा देकर दिल्ली में ले जाकर अपने भाई के साथ मिलकर दुष्कर्म करने और बंधक बनाकर रखने का आरोप लगाया था। कोर्ट के आदेश पर आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई थी। इस केस की सुप्रीम कोर्ट मॉनीटरिंग कर रही है।