बागपत। काठा नाव हादसे में बची कई सवारियों का मेरठ और दिल्ली के अस्पतालों में इलाज चल रहा है। इनमें से दंपति समेत चार महिलाओं को मेरठ के अस्पताल से छुट्टी मिल गई है। वे अपने घर पहुंच गए। पीड़ित महिलाएं अभी भी दहशत में है। पीड़ितों को देखने वालों का मकान में जमावड़ा लगा है।
इस दर्दनाक हादसे में 14 महिला और पांच पुरुषों की जान गई । जबकि कई को गोताखोरों और अन्य लोगों ने बचाया । उनका कई अस्पतालों में इलाज चल रहा है। मेरठ मेडिकल कॉलेज से शिमला, उनके पति राजवीर के अलावा अमरेश और मीना को छुट्टी मिल गई है। वे अपने घर पहुंच गई। महिलाएं अपने बच्चों को देख फूट-फूटकर रो पड़ी। परिजनों ने उनको समझा-बुझाकर शांत किया। उनको देखने वालों की मकानों में भीड़ लगी है।
बेटी की किस्मत से बची
मीना ने कहा कि वह नाव डूबते समय बेहोश हो गई । उसको कुछ नहीं पता कि वह कैसे यमुना से निकाली। इतना जरूर है कि वह अपने डेढ़ वर्षीय बेटी सोना की किस्मत से बची है।
तीसरी बार पानी में ऊपर आई
तो हाथ में आ गई चोटी
बागपत। पीड़ित महिला शिमला ने बताया मना करने के बाद भी नाविक ने सवारियां नाव में बैठाई। नाव डूबने के बाद वह भी पानी में नीचे चली गई थी। दो बार पानी में ऊपर आई, उसके हाथ में कुछ नहीं आया। तीसरी बार में उसके हाथ में एक महिला की चोटी आ गई । उसी के सहारे दोनों महिलाएं यमुना किनारे पर पहुंच गई।
मंजर याद कर कांप उठती है रूह
बागपत। पीड़ित अमरेश ने कहा हादसा याद आते ही रूह कांप उठती है। इसे काफी भूलाने की कोशिश करती हूं, लेकिन भूलाया नहीं जाता। हादसा याद करने पर रात भर नींद भी नहीं आती है।
मुझे तो अपनी जान की पड़ रही थी...
बागपत। राजवीर सिंह ने बताया हादसे के बाद वह डूब गया । उसे थोड़ा तैरना आता है। उस समय उसको सिर्फ अपनी जान की पड़ी थी। किसी तरह यमुना से निकला। यमुना से बाहर आने के बाद ही पत्नी की सुध आई।