दाहा/रमाला (बागपत)। अभिभावकों के इच्छा और अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई के दबाव में एक किशोर घर से भाग गया। मामला थाने तक पहुंचा। किशोर खुद ही घर लौट आया। न्यायपीठ सीडब्ल्यूसी ने काउंसिलिंग की तो किशोर ने असलियत बताई। इससे पहले भी इस तरह के मामले सामने आए हैं।
न्यायपीठ सीडब्ल्यूसी के न्याय प्राधिकारी के समक्ष यह मामला पहुंचा। रमाला थाना क्षेत्र के कासिमपुर खेड़ी गांव का एक व्यक्ति ईंट भट्ठे पर मजदूरी करके अपने दो बेटों का पालन-पोषण करता है। आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होने के बाद भी उसने अपने दोनों बेटों को एक इंग्लिश मीडियम स्कूल में दाखिला करा दिया। इंग्लिश मीडियम स्कूल की पढ़ाई उसके कक्षा आठ में पढ़ने वाले बड़े बेटे को रास नहीं आई और वह स्कूल बदलवाने की मां-बाप से जिद करने लगा। मां-बाप के नहीं मानने पर वह घर से भाग गया। परिजनों ने रमाला थाने में उसकी गुमशुदगी का मामला दर्ज कराया। हरिद्वार से खुद ही किशोर घर लौट आया। बुधवार को रमाला थाने की उप निरीक्षक चंद्ररेखा किशोर और उसके माता-पिता को लेकर न्यायपीठ सीडब्ल्यूसी के सामने पेश हुई। इंग्लिश मीडियम स्कूल में पढ़ने से बचने के लिए ही किशोर घर से भागा। अब उसके माता-पिता ने उसका दाखिला दूसरे स्कूल में कराया है। सीडब्ल्यूसी के न्याय प्राधिकारी डॉ. कुलदीप त्यागी, मालती शर्मा और राजीव यादव ने पुष्टि की है।