बागपत। ककौर गांव के जंगल में खटके में फंसे तेंदुए की वन विभाग की सुपुर्दगी में हुई मौत के मामले की जांच तेज हो गई है। वन संरक्षक एवं अपराध अनुसंधान नोएडा एचडी गिरीश ने वन विभाग की टीम के साथ ककौर गांव के जंगल में मौके पर जाकर छानबीन की। खटका लगाने वाले स्थान को देखा और इसके आसपास छानबीन की। बड़ौत रेंजर राजपाल सिंह ने छपरौली थाने में अज्ञात लोगों के खिलाफ तहरीर दी।
ककौर गांव के जंगल में मंगलवार को खटके में फंसे तेंदुए को ग्रामीणों ने वन विभाग और पुलिस को सुपुर्द कर दिया था। बड़ौत ले जाने के दौरान तेंदुए की मौत हो गई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से खुलासा हुआ कि श्वांस नली फटने और फेफड़ों में ब्लीडिंग से तेंदुए की मौत हुई थी। मामले की जांच कर रहे वन संरक्षक एवं अपराध अनुसंधान नोएडा एचडी गिरीश बृहस्पतिवार सुबह वन विभाग की टीम के साथ ककौर गांव के जंगल में पहुंचे। खटका लगाए गए स्थान को देखा और वनकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों से जानकारी जुटाई। करीब दो घंटे की छानबीन के बाद टीम वापस लौट गई। बड़ौत रेंज पर कर्मचारियों और अधिकारियों के बयान लिए और पूछा कि रेस्क्यू कैसे किया। बड़ौत और बागपत में शाम चार बजे तक छानबीन के बाद टीम वापस लौट गई।
दूसरी तरफ बड़ौत रेंजर राजपाल सिंह ने बताया कि तेंदुए को पकड़े जाने, खटका लगाने और मौत के मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ तहरीर दी गई है। पुलिस इसकी जांच कर रही है। छपरौली थानाध्यक्ष ने बताया कि जांच शुरू कर दी गई है।
अब तेंदुए की मौत की चल रही चार जांच
बागपत। अब चार स्तर पर अधिकारियों की टीमों ने तेंदुए की मौत प्रकरण की जांच शुरू कर दी। एक जांच वन संरक्षक एवं अपराध अनुसंधान नोएडा एचडी गिरीश, दूसरी जांच डीएफओ और तीसरी जांच पुलिस ने शुरू कर दी है। इसके अलावा बरेली में जांच के लिए विसरा भेजा गया है।
ककौर ने कहा, निर्दोषों को फंसाया तो ठीक नहीं होगा
बागपत। खटके से तेंदुए को बचाकर वन विभाग को सौंपने वाले ककौर गांव के ग्रामीणों का कहना है कि अगर वन विभाग ने किसी निर्दोष ग्रामीण को फंसाने की कोशिश की तो ठीक नहीं होगा। बृहस्पतिवार को गांव में दिनभर मामला चर्चा का विषय बना रहा। ग्रामीणों ने कहा कि शुक्रवार या शनिवार को गांव में पंचायत का आयोजन करने की तैयारी चल रही है। वन विभाग अपनी खामी पर लीपापोती करने की तैयारी में है। डीएफओ अनिल कुमार मिश्र का कहना है कि जांच निष्पक्ष होगी।
इन सवालों का चाहिए जवाब
बागपत। खटका किसने और क्यों लगाया, वन विभाग को किस समय सूचना मिली, टीम किस समय मौके पर पहुंची, टीम ने मौके पर पहुंचकर क्या किया, पिंजरा खपराना से ककौर तक आने में देरी क्यों हुई, तेंदुए की गर्दन लाठी से दबाने के लिए किसने कहा और अगर गलत तरीके से दबाई जा रही थी तो क्यों नहीं रोका, पुलिस की मदद क्यों नहीं ली गई, पशु चिकित्सकों को बुलाकर इंजेक्शन किसने और क्या लगवाया, तेंदुआ अगर बेहोश था तो उसे ले जाने का कोई दूसरा इंतजाम क्यों नहीं किया गया, करीब दस घंटे तक तेंदुए गांव के जंगल में ही क्यों रखा गया और वन विभाग की टीम गांव से बाहर निकालकर क्यों नहीं ले गई। पूरे प्रकरण में मौके पर कौन-कौन अधिकारी किस-किस समय पहुंचे और उन्होंने क्या किया।