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उतराखंड में राठी-बजरंगी के वर्चस्व की जंग की जांच

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बागपत। पूर्वांचल के डॉन मुन्ना बजरंगी की हत्या के मामले में पुलिस की जांच अब उत्तराखंड में वर्चस्व की जंग पर भी टिक गई है। राठी गैंग लंबे समय से उत्तराखंड में सक्रिय रहा है। बजरंगी भी अपने खास शूटर संजीव जीवा के जरिए उत्तराखंड में प्रॉपर्टी कब्जाने के धंधे में कूद गया था। पुलिस वर्चस्व की रंजिश की छानबीन में जुटी है। माना जा रहा है कि हत्या में उत्तराखंड से भी लिंक जुड़ा हो सकता है।
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सजायाफ्ता सुनील राठी लंबे समय से उत्तराखंड में अपने गुर्गों के माध्यम से प्रॉपर्टी कब्जाने और रंगदारी मांगने का काम कर रहा है। पिछले दिनों ही बागपत जेल से सुनील राठी ने रुड़की के डॉक्टर से रंगदारी मांगी थी, जिसमें राठी की मां और टीकरी की पूर्व चेयरपर्सन राजबाला चौधरी को भी जेल जाना पड़ा था। दूसरी तरफ मुन्ना बजरंगी ने अपने खास शूटर शामली के आदमपुर गांव निवासी संजीव जीवा के माध्यम से उत्तराखंड में पैर पसारने शुरू कर दिए थे। बजरंगी और राठी के बीच यहीं से वर्चस्व की जंग शुरू हुई। मुन्ना बजरंगी की बागपत जेल में हत्या को इस वर्चस्व की जंग का हिस्सा माना जा रहा है। पुलिस को अंदेशा है कि दोनों के बीच यहीं से रंजिश की नींव पड़ी। माना जा रहा है कि इसमें बाकी कड़ियां जुड़ती चली गई।
इसके अलावा जौनपुर की सियासत और राठी के भाई अरविंद राठी के साथ झांसी जेल में मारपीट भी हत्या की वजहों में से एक हो सकती है। एसपी जयप्रकाश का कहना है कि छानबीन की जा रही है। कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं।
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पूर्व सांसद धनंजय सिंह और राठी की करीबी
बागपत। पुलिस पूर्व सांसद धनंजय सिंह और सुनील राठी के रिश्तों को भी खंगालने में जुटी है। दोनों के परिवारों की मिलाने वाले शख्स की भी पुलिस को तलाश है। पुलिस जांच कर रही है कि क्या पूर्व सांसद की कोई भूमिका है। इसके अलावा क्या कोई राजनीतिक षड्यंत्र हो सकता है।
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