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धरना स्थल पर किसानों की मौत, दूसरा गंभीर, किसानों का हंगामा

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बड़ौत (बागपत)।
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किसान संघर्ष मोर्चा के तत्वावधान मेें तहसील में चल रहे पांच सूत्रीय मांगों को लेकर शनिवार की सुबह धरने पर बैठे एक किसान की हार्ट अटैक आने पर मौत हो जाने से किसानों में आक्रोश उत्पन्न हो गया। जबकि एक किसान की हालत बिगड़ गई। देखते ही देखते धरना स्थल पर भीड़ जमा हो गई। अधिवक्ताओं ने न्यायिक कार्यों का बहिष्कार किया। धरना स्थल पर कांग्रेस, सपा, शिव सेना, भाकियू, रालोद सहित सामाजिक संगठन के कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे । उन्होंने कहा जब तक मृतक के परिजनों को 50 लाख का मुआवजा और एक परिवार को सरकारी नौकरी की मांग पूरी नहीं होगी, किसान का शव उठने नहीं देंगे। आंदोलनकारी किसान शव को बर्फ पर रखे धरने पर बैठ गए। उनके पास एसडीएम पहुंचे और उन्होंने उन्हें 12 लाख का मुआवजा दिलाने का आश्वासन दिया, लेकिन किसान नहीं माने। उन्होंने कहा डीएम धरना स्थल पर आए और लिखित में दे तो तभी मानेंगे। धरना स्थल पर शाम पांच बजे जयंत चौधरी और सपा के एमएलसी वीरेंद्र गुर्जर पहुंचे और किसान के परिवार को हरसंभव मदद का भरोसा दिया। बाद एडीएम लोकपाल मौके पर पहुंचे और किसानों को मदद का भरोसा दिया। इसके बाद पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा। साथ किसानों ने धरना खत्म कर दिया।
तहसील मेें किसान संघर्ष मोर्चा के तत्वावधान से 21 मई से किसान पांच सूत्रीय मांगों को लेकर धरने पर बैठे हैं। उनकी मांग की है कि नलकूप के बिल 100 हार्स पावर के स्थान पर 180 हार्स पावर किए हैं, इससे सरकार वापस ले। हरियाणा के तरह 35 रुपये हार्स पावर की जाए। घरेलू बिल 430 प्रति माह के हिसाब से 840 रुपये कर किए हैं। इस बढ़ोत्तरी को वापस किया जाए, गन्ने का भुगतान कराएं और विद्युत निगम द्वारा किसानों पर केस दर्ज न की जाए, कई बार किसानों की एसडीएम से वार्ता हुई, लेकिन विफल रही।
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दो दिन से धरने पर बैठे जिवाना गांव के 60 वर्षीय उदयवीर पुत्र गिरिवर सिंह की शनिवार की सुबह साढे़ दस बजे सीने में दर्द उठने के बाद हार्ट अटैक से मौत हो गई, जबकि सिनौली गांव के किसान जिले सिंह की हालत बिगड़ गई। इससे किसानों में आक्रोश व्याप्त हो गया और इसकी जानकारी गांव-गांव किसानों को दे दी । सूचना पर रालोद के पूर्व विधायक वीरपाल राठी, पूर्व विधायक डॉ. अजय कुमार और गजेंद्र मुन्ना, सतेंद्र तोमर, सुरेश मलिक, विकास प्रधान, रालोद के जिलाध्यक्ष सुखवीर सिंह गठीना, भाकियू के राजेंद्र सिंह तोमर, देश खाप के चौधरी सुरेंद्र सिंह, थांबा खाप के चौधरी यशपाल सिंह, रणधीर प्रधान गुराना, धीरज उज्ज्वल, विक्रम राणा, धूम सिंह चेयरमैन, रालोद युवा इकाई के जिलाध्यक्ष प्रवेंद्र तोमर, राम कुमार चेयरमैन, मोहित मुखिया, अरुण तोमर बोबी, अक्षय मलिक, प्रियवत राणा, सपा के जिलाध्यक्ष मनोज तोमर, सुरेंद्र पंवार, जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष चौधरी राम कुमार सिंह, शहर अध्यक्ष राकेश शर्मा, किसान अधिकार सम्मेलन के संयोजक नरेंद्र राणा धरना स्थल पर पहुंचे। उन्होंने कहा किसानों की मांगों को लेकर 21 मई से किसान तहसील परिसर में धरना दे रहे हैं, लेकिन किसी भी अधिकारी ने आंदोलनकारियों सेवार्ता करने की जरूरत नहीं समझी। इस कारण ही एक किसान शहीद हो गया।
सूचना मिलते ही तहसीलदार मांगेराम चौहान धरना स्थल पर किसानों के बीच पहुंचे, लेकिन किसानों ने तहसीलदार से वार्ता नहीं की। बाद में एसडीएम अरविंद कुमार द्विवेदी आंदोलनकारियों के बीच पहुंचे और उन्होंने कहा कि वे 12 लाख का मुआवजा दिलाने की संस्तुति मुख्यमंत्री को भेज रहे हैं और किसान मेरे साथ चले और विद्युत निगम के एमडी से बातचीत कराएंगे, किसानों ने एसडीएम की बात भी नहीं मानी। फिर एसडीएम धरना स्थल किसानों के बीच आए तो नरेंद्र राणा के साथ उनके हाथ पकड़कर अभद्रता का परिचय दिया, लेकिन बाद मेें मामला शांत किया। चेतावनी दी कि एक घंटे में यहां पर डीएम या उच्चाधिकारी बातचीत नहीं करते तो वे उग्र आंदोलन शुरू करेंगे।
धरना स्थल पर शाम पांच बजे रालोद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जयंत चौधरी, सपा के विधान परिषद सदस्य वीरेंद्र गुर्जर, संजय लाठर, अर्जुन अवार्डी शौकेंद्र तोमर, कुलदीप उज्ज्वल, जाट संघर्ष समिति के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. संजीव आर्य, अशोक भूत, रालोद के जिला उपाध्यक्ष सुबोध राणा व अन्य लोग पहुंचे और उन्होंने धरने पर बैठे किसानों से बातचीत की और धरने पर शहीद हुए किसान को पुष्पाजंलि अर्पित की और उनके परिजनों से बातचीत की। जयंत चौधरी ने कहा कि इस आंदोलन को किसान संघर्ष समिति चला रही है, हमारा गठबंधन उनके साथ है, जब तक निर्णय नहीं होता, हम लोग यहां पर बैठे है। यह घटना बहुत दर्दनाक है। इस दौरान विधान परिषद सदस्य संजय लाठर ने घोषणा की कि पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से बातचीत के बाद निर्णय लिया गया कि गठबंधन की ओर से मृतक किसान के परिवार को पांच लाख रुपये दिए जाएंगे और उन्होंने डीएम और एडीएम को बुलाने की मांग की नहीं तो किसानों ने घोषणा की कि हाईवे पर शव रखकर जाम कर देगेे। बाद मेें एडीएम लोकपाल किसानों के बीच पहुंचे और उन्होंने कहा कि दो दिन में 12 लाख रुपये और 40 लाख के मुआवजे के लिए शासन को लिखा जाएगा और बिजली विभाग द्वारा किए नोटिस को वापस लेने और गन्ना भुगतान शीघ्र कराया जाएगा, इसके बाद धरनास्थल से किसानों ने शव पुलिस को उठने दिया। बाद में पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा। इसके बाद किसानों का धरना समाप्त हो गया।
इस किसान संघर्ष समिति मेें चौधरी बलजोर सिंह आर्य, जसवीर मलिक, ब्रजपाल सिंह, सोनू मान, यशपाल सिंह, विक्रम आर्य, बार के अध्यक्ष वेद पाल पंवार, धर्मवीर सिंह तोमर, जयवीर तोमर आदि रहे। इस मौके पर ललित सभासद, राजू तोमर सिरसली, रविंद्र हट्टी आदि रहे।

किसानों की मौत से सरकार की उल्टी गिनती शुरू: अखिलेश
लखनऊ। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा है कि बागपत जिले के बड़ौत में धरने पर बैठे किसान उदयवीर की मौत से भाजपा सरकार की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। रालोद के राष्ट्रीय प्रवक्ता अनिल दुबे ने मृत किसान के परिवार को 50 लाख की मदद और एक सदस्य को नौकरी देने की मांग की है।
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अखिलेश यादव ने शनिवार शाम ट्वीट कर कहा, बड़ौत में बिजली के बढ़े दामों व गन्ने के बकाया भुगतान के विरोध में धरने पर बैठे व महोबा, हमीरपुर, बांदा में कर्ज माफी के झूठे वादे के मारे किसानों की मौत आज कामयाबी गिना रही सरकार का सच बयां कर रही है। खेती, कारोबार, उद्योग व सौहार्द को मारने वाली सरकार का आज से काउंटडाउन शुरू हो गया है। उधर रालोद के प्रवक्ता अनिल दुबे ने कहा कि बड़ौत में किसान बकाया गन्ना मूल्य भुगतान और बिजली की बढ़ी दरें वापस लेने के लिए धरना दे रहे थे। आंदोलनकारी किसानों की मांगों पर कार्रवाई तो दूर, उनकी सुध तक नहीं ली गई। भाजपा सरकार में गांव, गरीब और किसान की पूरी तरह अनदेखी हो रही है। उन्होंने मृत किसान को शहीद का दर्जा, उनके पुत्र को सरकारी नौकरी और 50 लाख रुपये सहायता देने की मांग की है। कहा कि जिस देश में किसान को अपनी मॉंगों को लेकर मरना पडे़, उस देश की सरकार को जश्न मनाने का कोई अधिकार नहीं है। पिछले चार साल में केंद्र सरकार ने जनता के साथ छल और फरेब किया है। सरकार एक भी वादा पूरा नहीं कर सकी है। चार साल की उपलब्धि यह है कि केंद्र सरकार अपने वादों से मुकर गई। उन्होंने कहा कि आज पेट्रोल और डीजल के दाम आसमान छू रहे हैं जिसका असर आमजन पर पड़ रहा है। रोजमर्रा की वस्तुएं महंगी हो रही है और सरकार ने देश की जनता को मंहगाई और बेरोजगारी की आग में झोंक रखा है।
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