बड़ौत (बागपत)।
श्रमणाचार्य सुंदर सागर महाराज ने कहा जब इस जीवात्मा में कषाय रूपी गैस भरी हुई होती है, तब आत्मा का उत्थान नहीं हो पाता।
बृहस्पतिवार को विहर्ष सभागार में आयोजित धर्मसभा में उन्होंने कहा हमारी इज्जत स्वयं के व्यवहार से है। जब तीर्थंकर भगवान माता के गर्भ में आते हैं। सारे देवी देवता माता की सेवा में लग जाते हैं। उन्होंने कहा भाग्य कोई वस्तु नहीं। जीव स्वयं के सम्यक पूर्व शास्त्र से अपना भाग्य बनता है। पुण्य से जिन कुल मिलता है। वास्तव में भारत की कुल जनसंख्या का मात्र 0.37 प्रतिशत जैन कुल अर्थात जिनेंद्र के अनुयायी बोला जाता है। इस अल्प संख्या में ण्मोकार मंत्र बोलने वाले ही अति अल्प है और उनसे भी बहुत कम संख्या वाले जीव दिगंबरत्न धारण कर पाते हैं। वे बहुत ही बिरले जीव है। उन्होंने कहा बड़े भाग्य से आपको जिन धर्म की शरण मिली है ओर बड़े पुण्योदय से इतना विशाल मुनि संघ मिला है। इतना अच्छा भाग्य लेकर भी आत्म कल्याण का पुरुषार्थ न करो तो यह आपका दुर्भाग्य ही होगा। मंगलाचरण सुप्रिया दीदी ने किया। मंत्र संचारण बाल ब्रहमचारिणी रीता दीदी ने किया। इसमें प्रमोद जैन, अशोक जैन, संदीप जैन, बाल किशन जैन, अखिलेश जैन, अतुल जैन, नीरज जैन, प्रवीण जैन, वरदान जैन, मुकेश जैन आदि रहे।