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काठा हादसे के 14 माह बाद नाविक का बयान:

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बागपत। काठा नाव हादसे के 14 माह बाद पहली बार नाविक रिजवान ने हादसे का दर्द बयान किया। रिजवान का कहना है कि उसे मजिस्ट्रेट जांच की जानकारी नहीं है, लेकिन नाव किनारे से आगे बढ़ते ही छह लड़के अचानक कूदकर सवार हुए थे। इस कारण नाव का संतुलन बिगड़ गया। इससे नाव में पानी भरना शुरू हुआ, जब तक वह कुछ समझता नाव नियंत्रण से बाहर हो चुकी थी। हादसे के बाद वह बेहद घबरा गया था।
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काठा गांव में 14 सितंबर 2017 को यमुना किनारे नाव यमुना नदी में समां गई थी। इसके चलते 19 लोगों की मौत हो गई। बागपत के नाविक रिजवान को पुलिस ने गिरफ्तार किया, कोर्ट ने उसे जमानत दे दी। हादसे के बाद रिजवान मीडिया से दूर रहा। बृहस्पतिवार को पहली बार उसने मुंह खोला। रिजवान का कहना है कि नाव में 50-60 लोगों के सवार होने की बात गलत है। लगभग 25 लोग सवार थे। वह नाव लेकर चला तो, एकाएक छह लड़के किनारे से नाव में कूद गए। इससे नाव का संतुलन बिगड़ गया। एक तरफ से नाव में पानी भरने लगा। दो मिनट में ही नाव यमुना में समा गई, उसने कई लोगों को बचाया, लेकिन बहुत देर हो चुकी थी। भीड़ बढ़ने लगी थी, किसी तरह वह वहां से भाग निकला। उसे हादसे का आज भी अफसोस है। जिंदगी का बेहद दुखद समय था। मजिस्ट्रेट जांच की उसे जानकारी ही नहीं है।


क्या नाविक रिजवान के नहीं लिए गए बयान
बागपत। मजिस्ट्रेट जांच पूरी हो चुकी है। इसकी रिपोर्ट शासन को भेजी गई है। इस रिपोर्ट में नाविक रिजवान का बयान नहीं है। एडीएम अनिल कुमार मिश्र का कहना है कि जांच उनसे पुरानी है, वह इसका पता कराएंगे। रिजवान का कहना है कि उसे मजिस्ट्रेट जांच की जानकारी नहीं है।
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सबके बयान अलग-अलग
बागपत। नाव में कितने लोग सवार थे, इस पर सबके अलग-अलग बयान है। मजिस्ट्रेट जांच में 42 लोग बताए, ग्रामीण 60 से 70 लोग बता रहे हैं, जबकि नाविक का कहना है कि 25 से 30 लोग सवार थे।


नौ प्रत्यक्षदर्शी आए सामने
बागपत। हादसे के बाद काठा के सिर्फ नौ लोगों ने प्रत्यक्षदर्शी के तौर पर बयान दर्ज कराए हैं। 19 मरने वालों के परिवार ने भी बयान दर्ज कराए थे। किसान कृष्णपाल ने भी पांच लोगों के जबरन बैठने की बात कही है।


नाकामी को छिपाता रहा सिस्टम
बागपत। काठा में नाव चलने से लेकर डूबने और 19 लोगों की मौत के मामले में सिस्टम की नाकामी सामने आई है। हादसा सुबह करीब पौने सात बजे हुआ । काठा गांव में यमुना पार कर खेतों में जाने के लिए लोग सवार थे। नाव धंसने से 19 लोगों की मौत हो गई , नाराज लोगों ने शवों को दिल्ली-सहारनपुर हाईवे पर रखकर जाम लगाया। यहां पहुंची पुलिस ने शवों को जबरन उठाने का प्रयास किया। पुलिस ने लाठियां फटकारी तो लोगों का आक्रोश भड़क गया। ग्रामीणों ने पथराव शुरू कर दिया। एसडीएम बागपत की गाड़ी समेत सात वाहन क्षतिग्रस्त हो गए थे। महिला हेल्प लाइन की गाड़ी में आग लगा दी। अफसरों ने दौड़कर जान बचाई, 10 से अधिक पुलिसकर्मी और स्वास्थ्य कर्मी घायल हुए। सरकारी महकमों की लापरवाही और अदूरदर्शिता सामने आई, लेकिन कार्रवाई के नाम पर ठीकरा सिर्फ नाविक पर ही फोड़ा गया।
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