फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

फेसबुक पर हाजिर हैं... सुनील राठी, नीरज बवाना और अमित भूरा

विज्ञापन
विज्ञापन
बागपत। अपराध की दुनिया के शातिर सलाखों के पीछे हैं, लेकिन सोशल मीडिया पर इनकी मौजूदगी आए दिन दिखती है। पूर्वांचल के डॉन मुन्ना बजरंगी की हत्या में नामजद और तिहाड़ जेल में बंद सुनील राठी के नाम से बनाए एकाउंट से दलितों पर भी टिप्पणी की गई है। पटियाला जेल में बंद अमित भूरा के नाम से बनाए फेस बुक एकाउंट पर तो यह भी लिखा है कि आईएम बैक। नीरज बवाना और अमित भूरा के नाम से एक या दो नहीं बल्कि 10-10 से अधिक एकाउंट सोशल मीडिया पर संचालित किए जा रहे हैं।
विज्ञापन

सोशल मीडिया के दौर में खुद अपराधी और कई जगह अपराधियों के नाम से फर्जी एकाउंट संचालित किए जा रहे हैं। मुन्ना बजरंगी हत्याकांड में जेल में बंद सुनील राठी के नाम से फेस बुक पर खाता बनाया गया है, इसमें दलितों पर आपत्तिजनक टिप्पणी की। एकाउंट किसने बनाया है और कौन संचालित कर रहा है, पुलिस इसकी छानबीन में भी गुपचुप तरीके से जुटी है।
फेस बुक पर दिल्ली के अपराधी नीरज बवाना के नाम पर 10 से अधिक एकाउंट हैं। कई एकाउंट ऐसे हैं, जिनमें बवाना के जेल से तारीख पर जाने और वापस जेल में जाने की अप डेट उपलब्ध रहती है। यही नहीं समाचार पत्रों की कटिंग भी यहां पर डाली जाती है। एकाउंट कौन संचालित कर रहा है, इस पर पुलिस भी चुप्पी साधे हैं।
विज्ञापन

पटियाला जेल में बंद मुजफ्फरनगर के सरनावली गांव का अमित भूरा के नाम पर भी फेस बुक एकाउंट है। एक या दो नहीं बल्कि भूरा के नाम से दस से अधिक एकाउंट बना रखे हैं। इनमें कई विवादित पोस्ट और संकेत देने जैसी पोस्ट हैं। भूरा ने एक पोस्ट में लिखा है कि आईएम बैक।

रामवीर शौकीन का भांजा है नीरज बवाना
बागपत। शातिर अपराधी नीरज बवाना बागपत पुलिस के हाथों से भागे पूर्व विधायक रामवीर शौकीन का भांजा है। भूरा फरारी केस में बवाना पर मुकदमा दर्ज हुआ था। रामवीर शौकीन की फरारी में भी पुलिस बवाना की भूमिका की जांच कर रही है।

किसी को शक नहीं, जेल में चलते हैं मोबाइल
बागपत। पुलिस की जांच और कई बार छापेमारी में सामने आ चुका है कि जेल में मोबाइल चलते हैं। बागपत जेल में मुन्ना बजरंगी की हत्या के बाद से सबसे पहले जिला कारागार से ही सोशल मीडिया पर बजरंगी का फोटो वायरल किया, इससे जाहिर है कि जेल में भी मोबाइल चल रहे हैं। इसके अलावा कई बार मोबाइल बरामद हो चुके हैं।

शातिरों का गैंग तो नहीं चला रहा फेस बुक
बागपत। सवाल है कि अपराधी खुद जेल में सोशल मीडिया पर एक्टिव हैं या फिर इनके गैंग के सदस्य जेल से बाहर उनके नाम पर फेस बुक चला रहे हैं। असली एकाउंट कौन सा है और इस पर लिखी पोस्ट का मतलब शातिरों का गैंग समझ लेता है। फेस बुक पर कौन एक्टिव है, इसकी जानकारी तो छानबीन के बाद ही हो सकेगी।

किस काम की हाई सिक्योरिटी जेल
बागपत। नीरज बवाना ने 20 अक्तूबर को भ ी एक फेस बुक एकाउंट पर पोस्ट डाली, इसमें पुलिसकर्मी नीरज को जेल से बाहर लाते दिखाई दे रहे हैं। अब सवाल यह उठता है कि आखिरकार दिल्ली, पटियाला समेत कई हाई सिक्योरिटी जेल में बंद रहने के बाद भी कुख्यात खुद एकाउंट चला रहे हैं या उनके नाम से कोई दूसरा इन खातों का संचालन कर रहा है।

अभी तक नहीं मिला बागपत जेल का मोबाइल
बागपत। मुन्ना बजरंगी हत्याकांड के बाद से पुलिस और जेल अफसर अभी तक जांच में ही जुटे हैं। जांच में क्या चल रहा है। कितनी कामयाबी अभी तक की भागदौड़ से मिल पाई है। किन प्रदेशों के अफसरों से सहयोग लिया जा रहा है इ पर कुछ भी बोलने के लिये कोई तैदयार नहीं है। जांच चल रही है। जिस मोबाइल से फोटो वायरल किए गए हैं, वह अभी तक नहीं मिला है।

बवाना, भूरा और राठी का हरियाणा कनेक्शन
बागपत। एक लाख के इनामी रहे नीरज बवाना, दस लाख के इनामी रहे अमित उर्फ भूरा के फेस बुक एकाउंट से डाले गए पोस्ट पर सबसे अधिक कमेंट हरियाणा की पृष्ठभूमि के लोगों के ही है। कोई कुख्यात के जल्द बाहर आने की बात कह रहा है तो कोई इनकी खुलेआम तारीफ कर रहा है।

आईएम बैक, जल्द आ रहा हूं
बागपत। पंजाब की पटियाला जेल में बंद दस लाख रुपये के इनामी बदमाश रहे अमित उर्फ भूरा के नाम से बनाए गए फेस बुक अकाउंट पर 16 मार्च और 20 अप्रैल को दो अलग-अलग पोस्ट डाली गई है। इनमें से 20 अप्रैल की पोस्ट में उसे अंग्रेजी में दो शब्द आईएम बैक लिखकर अपनी आईडी का कवर फोटो भी अप डेट किया है। 16 मार्च की पोस्ट में उसने लिखा है, भाइयों में अब वापस आ रहा हूं।

सोशल मीडिया पर नजर रखती है पुलिस
बागपत। एसपी शैलेश कुमार पांडेय ने बताया कि सोशल मीडिया पर नजर रखने व उसकी मॉनीटरिंग करने के लिए पहले से ही अलग सेल काम कर रही है। दूसरे राज्यों से भी इसका समन्वय लगातार बना रहता है। अगर किसी विवादस्पद पोस्ट का अलग राज्यों से संबंध होता है तो उसके लिए सहयोग लिया जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें