बागपत। जिला कारागार में माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी की गोली मारकर हत्या करने वाले कुख्यात सुनील राठी को दूसरी जेल में शिफ्ट कराने के लिए एक या दो बार नहीं बल्कि 10 बार शासन को चिट्ठी भेजी गई। खतरे गिनाए, लेकिन किसी ने संज्ञान में नहीं लिया। सवाल है कि आखिर चिट्ठियां कहां गुम होती रही।
आजीवन की सजा काट रहे कुख्यात अपराधी सुनील राठी को करीब एक साल पहले 31 जुलाई 2017 को रुड़की जेल से बागपत जेल में शिफ्ट किया। जिला जेल में आते ही सुनील राठी और कुख्यात विक्की सुन्हैड़ा की नजदीकियां बढ़ीं। 50 हजार के इनामी रहे प्रमोद राठी गांगनौली गैंग के सदस्यों से सांठगांठ हो गई। जेल प्रबंधन ने लापरवाही दिखाई तो बागपत जेल में राठी की हुकूमत चल निकली। इससे पहले रुड़की जेल में भी राठी अपने कारनामों के लिए चर्चित रह चुका था। जेलर के कमरे से सोशल मीडिया पर सक्रिय रहा। इस बीच जेल में बंद कई दूसरी बंदियों को दूसरी जेलों में शिफ्ट किया। जेल प्रशासन ने सुनील राठी की इस गतिविधि के बारे में अधिकारियों को अवगत भी कराया। लगभग 10 बार राठी को दूसरी जेल में शिफ्ट करने के लिए चिट्ठियां भी लिखी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब बड़ा सवाल उठता है कि आखिर किसके दबाव में सुनील राठी को जेल से शिफ्ट नहीं किया जा रहा था। यदि राठी को पहले ही जेल से शिफ्ट कर देते तो डॉन मुन्ना बजरंगी की हत्या नहीं होती।