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अपराध के आका चलाते हैं पश्चिम की कईं जेल

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बागपत। पश्चिमी यूपी की जेलों में बड़े अपराधियों की तूती बोलती रही है। मुन्ना बजरंगी की हत्या से एक बार फिर यही साबित हो गया है कि अपराधी जेलों में खुलकर खेलते हैं।
यह पहला मामला नहीं है। गाजियाबाद की डासना जेल में रविंद्र प्रधान की मई 2008 को संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई । बस विस्फोट के आरोपी शकील अहमद और नजारत घोटाले के आरोपी आशुतोष की भी डासना में ही मौत हुई। मुजफ्फरनगर जेल में कैदी चंद्रहास की उसके साथी कैदी ने चाकू से गोद कर हत्या कर दी। सहारनपुर की जेल में भी इनामी बदमाश सुक्खा की चम्मच से गला रेत कर हत्या की। ब्यूरो
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34 सेकेंड में मौत की नींद सो गया बजरंगी
बागपत। पिछले करीब 34 साल से अपराध जगत में बेखौफ ताबड़तोड़ वारदातों को अंजाम देता आ रहा मुन्ना बजरंगी सिर्फ 34 सेकेंड में ही मौत की नींद सो गया। मौके से 10 खोखे बरामद हुए हैं। जेलर यूपी सिंह ने बताया कि छह बजकर 15 मिनट पर उन्हें गोली चलने की आवाज आई, जब तक वह पहुंचे मौत हो चुकी थी। ब्यूरो
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जागकर बिताई थी बजरंगी ने रात
बागपत। मुन्ना बजरंगी जेल में रविवार की रात में करीब सवा नौ बजे शिफ्ट किया गया। बताया गया है कि देर रात तक वह सो नहीं सका। वह अल सुबह उठ भी गया था। चाय पीने के बाद मुन्ना पार्क में ही बैठा था। ब्यूरो
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